स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत चुनौती याचिका खारिज

नई दिल्ली, 29 मई (यूएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के पॉक्सो मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर तत्काल गिरफ्तारी का खतरा टल गया है।

यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया।

प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के आदेश पर 21 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने पाया था कई बिंदुओं पर विरोधाभास

25 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए प्राथमिकी और जांच में कई विसंगतियों का उल्लेख किया था। अदालत ने कहा था कि कथित पीड़ितों ने घटना की तारीख 18 जनवरी बताई, जबकि शिकायतकर्ता ने 24 जनवरी को पुलिस को सूचना दी। देरी का कारण पूजा और यज्ञ बताया गया, जिस पर अदालत ने सवाल उठाए थे।

अदालत ने यह भी कहा था कि चिकित्सकीय रिपोर्ट में नाबालिगों के शरीर पर किसी बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और प्रारंभिक जांच के आधार पर आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिखाई देते।

जमानत की शर्तों में जांच में पूरा सहयोग करना, बिना अनुमति देश छोड़कर न जाना और गवाहों को प्रभावित न करना शामिल किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर जताया संतोष

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत केवल दुर्लभ परिस्थितियों में दी जानी चाहिए। साथ ही नाबालिगों की सुरक्षा और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई गई थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश और मामले के तथ्यों पर संतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत की शर्तों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और जांच बिना किसी बाधा के जारी रहे।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *