ईरान मुद्दे पर ट्रंप-नेतन्याहू में बढ़े मतभेद

वॉशिंगटन/तेल अवीव, 21 मई 2026 (यूएनएस)। ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीतिक मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप  और इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच हाल ही में हुई बातचीत में दोनों नेताओं का रुख अलग दिखाई दिया। जहां नेतन्याहू ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने और हमले जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं ट्रंप फिलहाल कूटनीतिक बातचीत और संभावित समझौते को मौका देना चाहते हैं।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर लंबी फोन वार्ता हुई, जिसमें भविष्य की रणनीति पर गंभीर चर्चा की गई। इस बातचीत से संकेत मिला कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अमेरिका और इजराइल पूरी तरह एकमत नहीं हैं।

सैन्य कार्रवाई बनाम बातचीत को लेकर अमेरिका और इजराइल के अलग-अलग संकेत

रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता और तेहरान बातचीत के जरिए केवल समय हासिल करना चाहता है ताकि वह खुद को फिर से मजबूत कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात इजराइल के लिए रणनीतिक रूप से अहम हैं और इस समय ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है।

वहीं अमेरिकी प्रशासन फिलहाल तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते खुले रखने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई की योजना बनाई थी, जिसे “ऑपरेशन स्लेजहैमर” नाम दिया गया था। हालांकि बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान को रोकने का फैसला किया।

बताया जा रहा है कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों की अपील के बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई टाल दी। इन देशों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की सलाह दी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध से बचना चाहता है, क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन फिलहाल व्यापक सैन्य संघर्ष के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की रणनीति अपना रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नेतन्याहू के सख्त रुख के पीछे घरेलू राजनीतिक कारण भी हैं। इजराइल में विपक्ष लगातार सरकार की सुरक्षा नीति पर सवाल उठा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett समेत कई विपक्षी नेता सरकार की आलोचना कर चुके हैं। ऐसे में नेतन्याहू राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मजबूत छवि बनाए रखना चाहते हैं।

इजराइल लंबे समय से ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है। तेल अवीव को आशंका है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई नया समझौता होता है तो तेहरान की क्षेत्रीय ताकत और प्रभाव और बढ़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा समय रणनीतिक रूप से उसके पक्ष में है और अगर अभी दबाव नहीं बनाया गया तो भविष्य में ईरान और मजबूत होकर उभर सकता है।

अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते इन मतभेदों ने पश्चिम एशिया की राजनीति को और जटिल बना दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाता है या क्षेत्र में सैन्य तनाव फिर तेज होता है।

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