1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगा वीबी-जी राम जी कानून, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिन रोजगार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 को देशभर में लागू करने की घोषणा कर दी है। सरकार ने 1 जुलाई 2026 से इस कानून के प्रावधान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने की तारीख तय की है। नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।

अब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की व्यवस्था थी। नए कानून में रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। सरकार के अनुसार यदि रोजगार मांगने के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे।

अधिनियम में मजदूरी भुगतान को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। भुगतान सीधे बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाएगा। यदि भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को प्रतिदिन बकाया मजदूरी का 0.05 प्रतिशत मुआवजा भी दिया जाएगा।

नई व्यवस्था में कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए फेस रिकग्निशन आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। हालांकि नेटवर्क या तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।

वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 में ग्राम पंचायतों को योजना के केंद्र में रखा गया है। परिवारों का पंजीकरण, रोजगार आवेदन स्वीकार करना, कार्यों का संचालन और रिकॉर्ड संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। ग्राम सभाओं की भागीदारी से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार की जाएंगी।

कानून के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका विकास और चरम मौसम से बचाव जैसे क्षेत्रों में कार्य किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के कार्यों को भी मजदूरी सहायता के लिए शामिल किया गया है।

सरकार ने कहा है कि योजना के तहत ठेकेदारों की अनुमति नहीं होगी और कार्य पूरी तरह श्रम आधारित होंगे। ऐसी मशीनों के उपयोग से बचा जाएगा, जिनसे मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर सरकार ने बताया कि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच 90:10 का अनुपात रहेगा, जबकि अन्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में यह अनुपात 60:40 होगा। बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

हर कार्यस्थल पर ‘जनता बोर्ड’ लगाया जाएगा, जिसमें कार्य की लागत, प्रकृति और अनुमानित श्रम दिवस की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों को साप्ताहिक सार्वजनिक बैठकें आयोजित करनी होंगी, ताकि योजना की प्रगति और भुगतान संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा सके।

केंद्र सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण रोजगार सुरक्षा को मजबूत करने, गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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