लखनऊ/हरदोई, 29 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचा विकास को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण किया। हरदोई के मल्लावां में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे को “नए उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन” बताते हुए कहा कि यह केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक परिवर्तन का आधार है।
विकास की रफ्तार एक्सप्रेसवे से भी तेज: पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब विकास एक्सप्रेसवे की रफ्तार से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे से किसानों, उद्योगों और युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। अब मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा मात्र 6–7 घंटे में पूरी हो सकेगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, हरदोई के हैंडलूम, उन्नाव के लेदर और प्रतापगढ़ के आंवला जैसे उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेजी से पहुंच मिलेगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी।
किसानों के योगदान को मुख्यमंत्री ने सराहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि इस परियोजना की सफलता के पीछे प्रदेश के किसानों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि 12 जिलों के एक लाख से अधिक किसानों ने अपनी भूमि देकर इस परियोजना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि करीब 18,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया, जबकि इसके किनारे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब के लिए 7,000 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगा।
12 जिलों को जोड़ेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है। इससे इन क्षेत्रों के बीच आवागमन तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा, वहीं व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
हाईटेक सुविधाओं से लैस आधुनिक एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ तैयार किया गया है और इसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है। इसमें 14 बड़े पुल, 165 छोटे पुल, 32 फ्लाईओवर, 453 अंडरपास और 21 इंटरचेंज शामिल हैं।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरे, आपातकालीन सेवाएं और 9 आधुनिक सुविधा केंद्र विकसित किए गए हैं। इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन एयरस्ट्रिप भी बनाई गई है, जहां जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान उतर सकते हैं।
टोल दरें भी हुईं घोषित
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल दरें जारी कर दी हैं। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 1.28 रुपये प्रति किमी, कार/जीप के लिए 2.55 रुपये प्रति किमी, हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए 4.05 रुपये प्रति किमी और भारी वाहनों के लिए 8.20 रुपये प्रति किमी तक शुल्क तय किया गया है।
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में होगा विकास
सरकार गंगा एक्सप्रेसवे को केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक बड़े इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रही है। इसके किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) बनाए जाएंगे, जहां निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
‘ग्रोथ मैप’ प्रदर्शनी में दिखा यूपी का भविष्य
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीडा की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जहां उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक संभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उन्हें प्रदेश के विकास मॉडल और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
जनउत्सव में बदला लोकार्पण समारोह
गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कार्यक्रम हरदोई में एक बड़े जनउत्सव में बदल गया। “भारत माता की जय”, “जय श्रीराम” और “हर-हर गंगे” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने पहुंचे।
प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे स्टेट’ बनाने की दिशा में कदम
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ के लक्ष्य की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि विकास, रोजगार, निवेश और समृद्धि की नई धारा बनकर उभरा है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखता है।
