लखनऊ, 29 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला जल्द सामने आ सकता है। 26 मई को मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में सरकार पंचायत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, पंचायत चुनाव समय पर कराना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। इसकी मुख्य वजह पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना और मतदाता सूची का समय पर तैयार न होना है। बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूची 10 जून तक ही तैयार हो पाएगी, जिससे चुनाव कार्यक्रम में देरी तय मानी जा रही है।
इस बीच, ओम प्रकाश राजभर ने भी संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जहां समय पर चुनाव कराने की मांग की गई है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह संभव नहीं लग रहा है।
यही कारण है कि सरकार ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही एक नई व्यवस्था लागू करने की भी तैयारी है, जिससे पंचायतों का कामकाज प्रभावित न हो।
अब तक नियम यह रहा है कि कार्यकाल समाप्त होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता है, लेकिन इस बार सरकार एक “प्रशासक समिति” बनाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। खास बात यह है कि इस समिति का अध्यक्ष वर्तमान ग्राम प्रधान को ही बनाए जाने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर निरंतरता बनी रहे।
सरकार का मानना है कि यदि चुनाव में देरी होती है तो यह व्यवस्था पंचायतों के दैनिक कार्यों और विकास योजनाओं को बिना रुकावट जारी रखने में मदद करेगी। साथ ही, इससे प्रशासनिक स्थिरता भी बनी रहेगी।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय जल्द लिया जा सकता है, जिससे प्रदेश की लाखों आबादी से जुड़ी पंचायत व्यवस्था प्रभावित न हो।
