सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला पर तीखे सवाल: ‘छूने से देवता अपवित्र कैसे?’

नई दिल्ली, 22 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर से जुड़े महिला प्रवेश और धार्मिक परंपराओं के मामले में सुनवाई के दौरान अहम सवाल उठे। अदालत ने पूछा कि किसी मूर्ति को छूने से वह अपवित्र कैसे हो सकती है और क्या इस आधार पर किसी भक्त को पूजा से रोका जा सकता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी श्रद्धालु को केवल जन्म, लिंग या परंपरा के आधार पर देवता को छूने या पूजा करने से रोका जाता है, तो क्या संविधान उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा है।

मंदिर प्रशासन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी ने दलील दी कि पूजा-पद्धति और परंपराएं किसी भी धर्म का अभिन्न हिस्सा होती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ माना जाता है, इसलिए मंदिर में कुछ विशेष परंपराएं लागू हैं। उनके अनुसार, मंदिर में आने वाले भक्तों को वहां की मान्यताओं का पालन करना होता है और पूजा की विधि देवता के स्वरूप के अनुरूप ही तय होती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित की है, जो 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। 2018 में अदालत ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था।

सुनवाई के दौरान अदालत अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और समानता के सिद्धांतों के बीच संतुलन पर भी विचार कर रही है। इसके साथ ही मस्जिदों और दरगाहों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकार, धार्मिक बहिष्कार जैसी कई व्यापक सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर भी बहस हो रही है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की समयसीमा तय करते हुए सभी पक्षों को निर्धारित अवधि में अपनी दलीलें रखने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही फैसला आ सकता है।

यह निर्णय न केवल सबरीमाला मंदिर, बल्कि देशभर में धार्मिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *