अखिलेश यादव का सरकार पर तंज, बोले- ‘भाजपाइयों के लिए एआई का मतलब इनकम’

लखनऊ, 09 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार जनता से अलग-अलग माध्यमों से वसूली करने में लगी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब भाजपा के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का मतलब ‘इनकम’ बन गया है।

अखिलेश यादव ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले ट्रैफिक पुलिस के जरिए चालान के नाम पर वसूली की जा रही थी, और अब एआई आधारित सिस्टम के नाम पर जनता को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तकनीक का इस्तेमाल सुधार के बजाय राजस्व बढ़ाने के लिए कर रही है।

उन्होंने ट्रैफिक जाम की समस्या पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि इसके पीछे कई वास्तविक कारण हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने खराब सड़कों, संकरी गलियों, ट्रैफिक सिग्नलों की खराब स्थिति, नाकाबंदी, रूट डायवर्जन, वन-वे व्यवस्था की कमी और जलभराव को जाम की प्रमुख वजह बताया। इसके अलावा डिवाइडरों की खराब हालत और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को भी जिम्मेदार ठहराया।

सपा प्रमुख ने ट्रैफिक पुलिस की कार्य परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनके कामकाज पर असर पड़ता है। साथ ही ड्राइवरों पर समय पर गंतव्य तक पहुंचने का दबाव, मानसिक तनाव और वाहनों की खराब फिटनेस भी दुर्घटनाओं और जाम का कारण बन रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी कम रहती है, जबकि आगे मोड़ों पर छिपकर चालान काटने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। डिजिटल पेमेंट के माध्यम से चालान वसूली को लेकर भी उन्होंने पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए और कहा कि इससे जवाबदेही कम हो रही है।

सीसीटीवी व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कई मामलों में रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं कराई जाती और तकनीकी खराबी का हवाला दिया जाता है, जिससे व्यवस्था की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इस व्यवस्था से परेशान हो चुकी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और तकनीक का उपयोग पारदर्शिता व सुविधा के लिए किया जाए, न कि वसूली के साधन के रूप में।

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