मतदाता सूची विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 60 लाख दावों-आपत्तियों पर आज ही फैसला करने का निर्देश केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी, न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर जताई चिंता

नई दिल्ली, 6 अप्रैल। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए करीब 60 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों पर सोमवार को ही फैसला करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी और उन्हें वापस नहीं बुलाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। एक महिला न्यायिक अधिकारी द्वारा अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर व्यक्त की गई आशंका का वीडियो देखने के बाद अदालत ने कहा कि हाल के घटनाक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि सरकारी तंत्र सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो वह उचित कदम उठाने पर विचार करेगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों का निस्तारण तेजी से किया जाए, लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष और व्यवस्थित होनी चाहिए। अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपीलीय अधिकरणों के लिए एक समान प्रक्रिया तय करने हेतु तीन पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति गठित करने को कहा है।

पीठ ने यह भी बताया कि 6 अप्रैल की दोपहर तक करीब 60 लाख मामलों में से 59 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जा चुका है। मालदा जिले जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी, जहां अधिकारियों को विरोध और बाधाओं का सामना करना पड़ा, वहां लगभग आठ लाख मामलों का निस्तारण हो चुका है।

निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि शेष मामलों पर भी सोमवार को ही निर्णय लिया जाएगा और रात तक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी। साथ ही लंबित डिजिटल हस्ताक्षरों को अपलोड करने के लिए 7 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकरणों के प्रभावी और निष्पक्ष संचालन के लिए शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि निर्वाचन आयोग की भूमिका मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ाने की है, न कि उसे सीमित करने की।

अदालत ने यह भी कहा कि अपीलों के निस्तारण में समय लग सकता है, लेकिन मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब सभी लंबित मामलों पर फैसला होने और पूरक मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *