अनिल अंबानी समूह पर 73 हजार करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी की जांच, सीबीआई का सुप्रीम कोर्ट में दावा

नयी दिल्ली, 6 अप्रैल (UNS)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि वह उद्योगपति अनिल अंबानी के समूह से जुड़े सात मामलों में कुल लगभग 73,000 करोड़ रुपये की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी की जांच कर रही है। यह जानकारी फरवरी में शीर्ष अदालत में दायर स्थिति रिपोर्ट में दी गई है।

जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि इन मामलों में कुछ सरकारी कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीबीआई और वित्तीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद उच्चतम न्यायालय ने 23 मार्च को एक आदेश जारी किया।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अन्य मामलों में हुए नुकसान भी कई हजार करोड़ रुपये के हैं, जो मिलाकर कुल लगभग 73,006 करोड़ रुपये के दावे बनते हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह आरोपों की सच्चाई पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है और केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र तरीके से पूरी हो।

प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि उसने कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें कथित “प्रोजेक्ट हेल्प” से संबंधित जानकारी मिली है। इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दिवाला कार्रवाई कथित तौर पर असंबंधित ऋणदाताओं के माध्यम से जानबूझकर शुरू की गई थी।

अदालत ने ईडी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आईबीसी प्रक्रिया के तहत अधिग्रहण संबंधी सभी फंडिंग आठ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के समूह के माध्यम से की गई थी। साथ ही यह भी संज्ञान में आया कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के दावे का निपटारा केवल 26 करोड़ रुपये में किया गया।

ईडी ने यह भी बताया कि उसने इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और वर्तमान में रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े आठ मामलों की जांच कर रहा है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को एजेंसी ने यह भी सूचित किया कि उसे इस जांच से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी अन्य एजेंसियों से अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने सभी एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों को ईडी के साथ पूर्ण सहयोग करने और आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

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