ईरान संघर्ष पर कूटनीतिक पहल तेज, इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक

इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई है। इस बैठक की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और तटस्थ रुख के कारण बातचीत के लिए उपयुक्त मंच माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है। बैठक के दौरान मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। इसके अलावा इशाक डार तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में शामिल हो रहे हैं।

बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, संभावित युद्धविराम और आगे की कूटनीतिक रणनीति पर चर्चा की जा रही है। विदेश मंत्रियों का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात का कार्यक्रम है, जहां इस पूरे संकट पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श होगा।

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने ईरान को अमेरिका की ओर से तैयार एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी सौंपा है, जिस पर फिलहाल तेहरान विचार कर रहा है।

इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, मिसाइल कार्यक्रम में कमी लाना, क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन समाप्त करना जैसे बिंदु शामिल हैं। बदले में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देने की बात कही गई है।

बैठक के लिए इस्लामाबाद को चुने जाने के पीछे प्रमुख कारण पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ संतुलित संबंध माने जा रहे हैं। यही वजह है कि इसे ‘न्यूट्रल ग्राउंड’ के रूप में देखा जा रहा है। शुरुआत में यह बैठक तुर्किये में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे इस्लामाबाद स्थानांतरित कर दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र पश्चिम एशिया के प्रमुख देश हैं और उनकी संयुक्त पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान लगातार पलटवार कर रहा है, जिससे हालात और जटिल बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत तभी सफल हो सकती है, जब सभी पक्ष कुछ रियायतें देने को तैयार हों। इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष अपने चरम पर है और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह बैठक किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाती है या यह प्रयास केवल कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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