पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती तेल कीमतों का असर कम करने के लिए उठाया कदम, सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये का पड़ेगा बोझ
नयी दिल्ली, 27 मार्च (UNS)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण बढ़ी कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों के प्रभाव से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देना है। इस निर्णय से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व बोझ पड़ने का अनुमान है।
बृहस्पतिवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर भी शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
सरकार ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए उठाया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उत्पाद शुल्क में यह कटौती उपभोक्ताओं को संभावित मूल्य वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा आवश्यक वस्तुओं की लागत और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं से नागरिकों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की जाए या फिर राजस्व पर पड़ने वाले बोझ को स्वयं वहन किया जाए। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए दूसरा विकल्प चुना है।
सरकार के अनुसार, वर्तमान में पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 11.9 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 7.80 रुपये प्रति लीटर रह जाएगा। देश में सालाना लगभग 175 अरब लीटर ईंधन की खपत को देखते हुए इस कटौती का राजकोषीय प्रभाव काफी बड़ा माना जा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में किसी प्रकार के लॉकडाउन की अफवाहें निराधार हैं और सरकार ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
