‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में सीबीआई की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज, लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका

नयी दिल्ली, 24 मार्च । राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनके और उनके परिवार से जुड़े कथित ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए का प्रावधान इस मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह धारा वर्ष 2018 में लागू हुई थी, जबकि आरोप वर्ष 2004 से 2009 के बीच के हैं।

तकनीकी आधार पर चुनौती देने की दलील खारिज

अदालत ने राजद प्रमुख की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि सीबीआई की कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, क्योंकि जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली थी।
न्यायालय ने कहा कि यदि पूर्व अनुमोदन से संबंधित तकनीकी दलील पर देर से चुनौती देने की अनुमति दी जाती है, तो इससे आपराधिक न्याय प्रणाली के सुव्यवस्थित संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व स्वीकृति का अभाव प्रारंभिक जांच, प्राथमिकी दर्ज किए जाने, जांच या संज्ञान आदेशों को स्वतः अमान्य नहीं बनाता है।

नियुक्तियों के बदले जमीन लेने का आरोप

अधिकारियों के अनुसार, यह कथित मामला भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में वर्ष 2004 से 2009 के दौरान की गई ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले भर्ती किए गए लोगों द्वारा राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूमि उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई थी।

अदालत ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता नियुक्ति संबंधी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे, बल्कि केवल प्रभाव डाल सकते थे। क्या वास्तव में उन्होंने प्रभाव डाला या मौखिक निर्देश दिए, यह साक्ष्यों की जांच का विषय है और इस स्तर पर इसका अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता।

आरोपपत्र और संज्ञान आदेश रद्द करने की मांग भी ठुकराई

न्यायालय ने वर्ष 2022, 2023 और 2024 में दाखिल तीन आरोपपत्रों तथा बाद में लिए गए संज्ञान आदेशों को रद्द करने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में बाद में आवश्यक मंजूरी दिए जाने से याचिकाकर्ता का पूर्वाग्रह का दावा कमजोर हो गया है और मामला आगे बढ़ चुका है।

सीबीआई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि इसे आरोप तय होने के चरण में देरी से दायर किया गया है और धारा 17ए का प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होता।

मामला 2022 में दर्ज, आरोपी फिलहाल जमानत पर

यह मामला 18 मई 2022 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। वर्तमान में यादव (77) और अन्य आरोपी जमानत पर हैं।

नौ जनवरी को निचली अदालत ने यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था, जबकि 16 फरवरी को औपचारिक रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ आरोप तय किए गए।

हालांकि लालू प्रसाद यादव ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है, वहीं इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी एक अन्य याचिका अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है।

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