नई दिल्ली, 24 मार्च ।महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और उसकी रूपरेखा पर चर्चा के लिए जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
यह मांग मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं द्वारा उठाई गई है। खरगे के संसद भवन स्थित कार्यालय में सोमवार को विभिन्न विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने के तौर-तरीकों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के बाद कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया। पत्र में कहा गया है कि महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट रोडमैप और प्रस्तावित संशोधनों की जानकारी सभी दलों को दी जानी चाहिए, ताकि बैठक अधिक सार्थक और परिणामकारी हो सके।
चुनाव के बाद बैठक की मांग
विपक्षी दलों ने सुझाव दिया है कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनावों के मतदान संपन्न होने के बाद आयोजित की जाए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद भवन में रिजिजू से मुलाकात कर उन्हें यह पत्र सौंपा।
इस पत्र पर कांग्रेस के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस इस पहल में शामिल नहीं हुई।
सरकार दो विधेयक लाने की तैयारी में
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार संसद के चालू बजट सत्र में दो नए विधेयक लाने की इच्छुक है, जिनका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने का रास्ता तैयार करना है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कुछ सहयोगी दलों और विपक्ष के क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर आम सहमति बनाने की कोशिश की।
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में संसद ने संविधान संशोधन के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया था। हालांकि, इस कानून को लागू करने की शर्त परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) की प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, जिस प्रस्तावित रूपरेखा पर चर्चा चल रही है, उसके अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो सकती है, जिनमें से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर सर्वदलीय सहमति बन जाती है, तो देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
