मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव पर 200 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर

नयी दिल्ली, 12 मार्च । मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव के लिए 200 से अधिक सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा के 130 सांसदों और राज्यसभा के 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। संभावना है कि यह नोटिस शुक्रवार को संसद के किसी एक सदन में पेश किया जाएगा, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे किस सदन में प्रस्तुत किया जाएगा।

विपक्ष के एक नेता ने बताया कि सांसदों ने इस नोटिस को लेकर काफी उत्साह दिखाया और आवश्यक संख्या पूरी हो जाने के बाद भी कई सांसदों ने हस्ताक्षर किए।

नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।

एक अन्य सूत्र के अनुसार, इस नोटिस पर विपक्षी गठबंधन इंडिया गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि पार्टी अब आधिकारिक रूप से इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

यह पहली बार है जब किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए इस प्रकार का नोटिस दिया गया है।

एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सात आरोप लगाए गए हैं। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना तथा बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना जैसे आरोप शामिल हैं।

विपक्षी दलों ने कई मौकों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की मदद करने का आरोप लगाया है, विशेषकर मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया महाभियोग के समान होती है, जो भारत का उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। महाभियोग केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही लगाया जा सकता है।

सीईसी को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसे पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है—सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *