नई दिल्ली, 21 फरवरी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापक वैश्विक शुल्क आदेश रद्द होने के बाद अमेरिका ने आयातित वस्तुओं पर नया अस्थायी वैश्विक शुल्क लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत अब भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत जवाबी आयात शुल्क लागू होगा। यह नया शुल्क 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार यह शुल्क वैश्विक स्तर पर आयातित वस्तुओं पर समान रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि कुछ आवश्यक वस्तुओं को इस अस्थायी शुल्क से छूट दी गई है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक, प्राकृतिक संसाधन, दवाएं, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन और अंतरिक्ष उत्पाद शामिल हैं।
आयात शुल्क वह कर होता है जो कोई देश अन्य देशों से आने वाले उत्पादों पर लगाता है। आमतौर पर कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। भारत के संदर्भ में पहले अमेरिकी नीति के तहत कुल प्रभावी शुल्क 25 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जबकि अगस्त 2025 में लगाए गए अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क के कारण यह प्रभावी बोझ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
हालिया नीति परिवर्तन के बाद यदि किसी भारतीय उत्पाद पर अमेरिका में पहले से पांच प्रतिशत सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) शुल्क लागू है, तो अब उसके ऊपर 10 प्रतिशत नया शुल्क जुड़कर कुल प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत रह जाएगा। इससे पहले यही संयुक्त प्रभाव 30 प्रतिशत तक पहुंच जाता था।
हालांकि कुछ उद्योगों के लिए राहत सीमित रहेगी। इस्पात, एल्युमिनियम और तांबे जैसे क्षेत्रों पर 50 प्रतिशत शुल्क यथावत रहेगा। इसके अलावा वाहनों के कुछ पुर्जों पर भी उच्च शुल्क जारी रहेगा।
इस बीच भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देश अगले महीने एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बदले हुए शुल्क ढांचे के बाद भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लाभों का नए सिरे से मूल्यांकन करना चाहिए। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत के पक्ष में 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया गया।
