जम्मू, 19 फरवरी । मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की पूर्ण गरिमा और सुरक्षा के साथ घाटी में वापसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया एक स्पष्ट वादा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद और उसके समर्थक नेटवर्क को न तो माफ किया जाएगा और न ही भुलाया जाएगा।
उपराज्यपाल प्रोफेसर अशोक कौल की पुस्तक Kashmir-Nativity Regained के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और क्षेत्र के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आतंकवाद के प्रभाव से क्षेत्र को पूरी तरह मुक्त करने के प्रयास निर्णायक रूप से जारी हैं।
मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडित समुदाय के साहस और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि विस्थापन के बावजूद समुदाय ने अपनी परंपराओं, भाषा और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि 1989-90 की त्रासदी का दर्द आज भी गहरा है और इसे भुलाया नहीं जा सकता।
उपराज्यपाल ने वर्ष 2021 में शुरू किए गए कश्मीरी प्रवासी वेब पोर्टल का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य विस्थापित परिवारों की संपत्तियों को पुनः प्राप्त कराने में सहायता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि अपनी ही भूमि पर परदेसी बन जाना मानवता के सबसे बड़े दुखों में से एक है और इस पीड़ा को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने न केवल कश्मीरी पंडितों, बल्कि हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों को भी निशाना बनाया है। प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने, रोजगार उपलब्ध कराने और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीरी पंडितों की नई पीढ़ी में अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद मजबूत हुई है और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
