निर्वाचन आयोग पर तृणमूल का आरोप, व्हॉट्सऐप निर्देशों को लेकर विवाद तेज

कोलकाता, 18 फरवरी (RNN)। अभिषेक बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव अधिकारी व्हॉट्सऐप के माध्यम से निर्देश जारी कर रहे हैं, जो कथित रूप से उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक व्हॉट्सऐप समूह की कथित चैट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने पारदर्शिता, विधिसम्मत प्रक्रिया और आधिकारिक संचार माध्यमों के पालन पर जोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि औपचारिक और जवाबदेह तरीकों के बजाय अनौपचारिक डिजिटल माध्यमों से निर्देश भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने विशेष सूची पर्यवेक्षक सी. मुरुगन द्वारा सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों को सीधे निर्देश दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। बनर्जी के अनुसार, विश्वसनीय सूचना है कि जन्म प्रमाणपत्र की स्वीकार्यता संबंधी निर्देश व्हॉट्सऐप समूह में दिए जा रहे हैं, जिससे मतदाता सूची से अधिक नाम हटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों की भूमिका सहायक तक सीमित रखने के संबंध में न्यायालय के निर्देशों का पालन होना चाहिए।

डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिलों से जुड़े विशेष सूची पर्यवेक्षकों के लॉगिन विवरण एक ही स्थान से नियंत्रित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को न्यायालय के समक्ष उठाएगी, जहां एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास बताया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि एसआईआर रुकने से तृणमूल कांग्रेस को कई विधानसभा क्षेत्रों में लाभ हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि बैरकपुर सीट पर पिछली बार बड़ी संख्या में फर्जी वोट पड़े थे।

भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने तृणमूल के आरोपों को “सस्ता राजनीतिक नाटक” करार देते हुए कहा कि संबंधित संदेश निर्देश नहीं, बल्कि निर्धारित मानकों का स्पष्टीकरण मात्र हैं।

मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है और अब निगाहें न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

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