तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, 18 महीने का अंतरिम शासन समाप्त

ढाका, 17 फरवरी। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान ने मंगलवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर देश में 18 महीने से जारी अंतरिम शासन का अंत कर दिया। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के बाद नई निर्वाचित सरकार के गठन को राजनीतिक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शपथ ग्रहण समारोह राजधानी ढाका स्थित जातीय संसद साउथ प्लाजा के खुले परिसर में आयोजित किया गया। परंपरा से हटकर आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने रहमान को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में बांग्लादेश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ कई पड़ोसी देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। भारत की ओर से ओम बिरला ने भाग लिया।

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद रहमान ने संविधान के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार कानून के शासन, आर्थिक स्थिरता और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। उन्होंने राष्ट्रीय एकता पर बल देते हुए कहा कि विभिन्न विचारधाराओं के बावजूद देशहित सर्वोपरि होना चाहिए।

तारिक रहमान का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। लगभग 17 वर्षों तक लंदन में स्वनिर्वासन में रहने के बाद वह हाल ही में स्वदेश लौटे थे। उनकी पार्टी ने हाल में हुए संसदीय चुनावों में बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

नई सरकार के गठन के साथ ही अंतरिम प्रशासन के दौरान उत्पन्न राजनीतिक अनिश्चितता के दौर का अंत हुआ है। अंतरिम शासन की अवधि में कानून व्यवस्था, आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय संबंधों को लेकर कई चुनौतियां सामने आई थीं। विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार को आर्थिक पुनरुद्धार, निवेश आकर्षित करने और संस्थागत सुधारों पर तत्काल ध्यान देना होगा।

शपथ ग्रहण समारोह में 25 कैबिनेट मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी पदभार संभाला। नई मंत्रिपरिषद में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने को समावेशी शासन की दिशा में कदम बताया जा रहा है। हालांकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने से राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है।

हालिया चुनावों में प्रमुख विपक्षी ताकतों के कमजोर पड़ने के बाद सत्ता संतुलन में बदलाव देखा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग चुनावी प्रक्रिया से बाहर रही, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का स्वरूप प्रभावित हुआ। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने उल्लेखनीय सीटें हासिल कर संसद में अपनी उपस्थिति मजबूत की है।

प्रधानमंत्री रहमान ने अपने पहले संबोधन में कहा कि देश एक नाजुक आर्थिक स्थिति, कमजोर संस्थागत ढांचे और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास के माध्यम से जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने का प्रयास करेगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नई सरकार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आर्थिक सुधारों और राजनीतिक समावेशन के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। आने वाले महीनों में नीतिगत फैसले बांग्लादेश की आंतरिक स्थिरता और क्षेत्रीय संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।

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