मुख्यमंत्री ने काशी में मणिकर्णिका घाट के साथ ही राजमाता अहिल्याबाई की मूर्ति को तुड़वा दिया: अखिलेश

लखनऊ, 17 फरवरी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि काशी में विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि मणिकर्णिका घाट के आसपास तोड़फोड़ की गई और राजमाता अहिल्याबाई की मूर्ति भी हटाई या क्षतिग्रस्त की गई है। यादव ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों, विशेषकर सनातन समाज और पाल समुदाय में नाराजगी है।

एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए यादव ने आरोप लगाया कि काशी क्षेत्र में कई मंदिरों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल नरेश द्वारा दान किया गया ऐतिहासिक घंटा भी अब वहां नहीं दिख रहा है, जो सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के संरक्षण के बजाय उन्हें विकास परियोजनाओं की आड़ में बदला जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान वाराणसी में शंकराचार्य पर लाठीचार्ज का जिक्र किया गया था। यादव ने कहा कि वह घटना विशेष परिस्थितियों में हुई थी और बाद में समाजवादी पार्टी सरकार ने शंकराचार्य से क्षमा भी मांगी थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी धार्मिक परंपराओं के सम्मान की पक्षधर रही है।

यादव ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने शंकराचार्य को गंगा में स्नान करने से रोका और पवित्र त्रिवेणी क्षेत्र में उनका अपमान हुआ। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और सम्मान अपेक्षित है, लेकिन सरकार इस मामले में असफल रही है।

इसके साथ ही यादव ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में बनाई जा रही पानी की टंकियां निर्माण गुणवत्ता के अभाव में ढह रही हैं। उनके अनुसार, लखीमपुर और आगरा सहित कई जिलों में पानी की टंकियों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जो योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों की ओर संकेत करती हैं।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य जनता को सुविधाएं देना होना चाहिए, लेकिन यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ही संदिग्ध हो, तो इससे सरकारी नीतियों पर जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने मांग की कि धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है, खासकर तब जब धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े सवाल उठ रहे हों।

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