लखनऊ, 17 फरवरी। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में आम जनता को हो रही कथित परेशानियों के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश विधानसभा से बहिर्गमन किया। बजट सत्र के सातवें दिन यह मामला कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत उठाया गया, लेकिन चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया।
सपा के वरिष्ठ विधायक मनोज कुमार पारस ने नियम-56 के तहत सदन की कार्यवाही रोककर इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आय प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र के अभाव में बड़ी संख्या में लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के कारण जनता को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सपा विधायक कमाल अख्तर ने भी इस मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा कि कई नवगठित नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में परिवार रजिस्टर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण लोगों को जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस संबंध में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि जिस क्षेत्र का मामला उठाया जा रहा है, उससे संबंधित विधायक अलग जिलों से हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कहीं भी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने में कोई व्यवस्थित समस्या नहीं है और इस विषय पर पहले भी संतोषजनक उत्तर दिया जा चुका है।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन का प्रत्येक सदस्य प्रदेश के किसी भी क्षेत्र का मुद्दा उठाने का अधिकार रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर अधिकारियों द्वारा प्रमाणपत्र जारी करने से मना किया जा रहा है।
सदन की कार्यवाही के दौरान सतीश महाना ने कहा कि यह विषय नियम-56 के अंतर्गत नहीं आता, इसलिए सूचना अग्राह्य की जाती है। इसके बाद सपा सदस्यों ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन कर दिया।
सपा विधायक रागिनी सोनकर ने बताया कि विपक्ष का मानना है कि आम जनता की समस्याओं पर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही, जिसके विरोध में यह कदम उठाया गया।
