असहमति का सम्मान न कर सके तो कांग्रेस के लिए ‘विनाशकारी’ स्थिति: मणिशंकर अय्यर

नई दिल्ली, 17 फरवरी। मणिशंकर अय्यर ने पार्टी नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकती, तो यह उसके लिए “विनाशकारी” होगा और ऐसी स्थिति में पार्टी को शासन करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी चुनौती दी कि पार्टी नेतृत्व राहुल गांधी से उनके पिता राजीव गांधी का 1989 का धर्मनिरपेक्षता संबंधी वक्तव्य दोहरवाए।

नई दिल्ली में अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो संदेश में अय्यर ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास कई विचारों और असहमतियों के साथ आगे बढ़ने का रहा है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पार्टी में मतभेदों को स्थान दिया जाता था, लेकिन आज यह परंपरा कमजोर पड़ती दिख रही है।

अय्यर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उन्होंने हाल ही में पिनराई विजयन की प्रशंसा की थी और उनके पुनः मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई थी, जिस पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी से पार्टी का कोई संबंध नहीं है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे दबाने से राजनीतिक नुकसान होता है। उन्होंने दावा किया कि जब पार्टी में विरोध को कुचला जाता है, तो परिणाम नकारात्मक होते हैं। उन्होंने 1989 में लोकसभा में राजीव गांधी के उस वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि “सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है।”

अय्यर ने कहा कि कांग्रेस एक विचारधारा है, जिसके कई रास्ते हो सकते हैं, और असहमति उसी जीवंत परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि वह आलोचना और मतभेद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माने, न कि चुनौती के रूप में।

अपने संदेश के अंत में अय्यर ने कहा कि यदि कांग्रेस असहमति को सम्मानपूर्वक संभालने की क्षमता खो देती है, तो यह पार्टी के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती होगी। उन्होंने ‘राजीव गांधी अमर रहे’ का नारा लगाकर अपनी बात समाप्त की।

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