लखनऊ। आम आदमी पार्टी के शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने टीईटी (TET) और आरटीई कानून से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण वर्षों से कार्यरत अनुभवी शिक्षक असमंजस और असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गए हैं।
महेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की पात्रता पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है, जो उनके लंबे शिक्षण अनुभव और योगदान का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि अनुभवी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना उनके मनोबल को तोड़ने जैसा है और इसे शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ कदम बताया।
उन्होंने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि बड़े आर्थिक निर्णयों के लिए नियमों में त्वरित बदलाव संभव हैं, तो शिक्षकों के हित में संसद के माध्यम से अध्यादेश लाकर आरटीई अधिनियम में संशोधन क्यों नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, दशकों के अनुभव को एक लिखित परीक्षा से कमतर आंकना शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।
आप नेता ने मांग की कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को ‘वन-टाइम रिलैक्सेशन’ दिया जाए और उनके अनुभव को ही पात्रता का आधार माना जाए। उन्होंने कहा कि अनेक शिक्षक 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित कर समाज निर्माण में योगदान दिया है। ऐसे शिक्षकों को पुनः पात्रता परीक्षा के दबाव में लाना अनुचित और अव्यावहारिक है।
महेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आम आदमी पार्टी शिक्षकों के समर्थन में व्यापक आंदोलन चलाएगी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और गुरु सम्मान से जुड़ा है, जिसे लेकर पार्टी राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आवाज उठाएगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी शिक्षकों की समस्याओं को गांव-गांव और गली-गली तक ले जाएगी और जनसमर्थन जुटाएगी। साथ ही सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील भी की।
इस बीच, शिक्षक संगठनों से जुड़े कई प्रतिनिधियों ने भी अनुभवी शिक्षकों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग उठाई है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पात्रता मानकों और अनुभव के संतुलन पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है, ताकि शिक्षकों के अधिकारों और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों को सुनिश्चित किया जा सके।
राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा आने वाले समय में और तेज होने के संकेत दे रहा है, क्योंकि विभिन्न दल शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रश्नों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।
