लखनऊ, 13 फरवरी (RNN)। योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में पिछले महीने माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान के लिए जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शंकराचार्य बनने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और हर व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य नहीं बता सकता।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को पीठ का आचार्य बनकर वातावरण खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा, “क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूम सकता है, मंत्री बनकर घूम सकता है या समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूम सकता है? इसके लिए एक व्यवस्था है। भारत के सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं।”
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित माना जाता है और इस पद की अपनी मर्यादा एवं प्रक्रिया है।
सपा सरकार पर भी साधा निशाना-
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2015 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद पर हुए लाठीचार्ज का उल्लेख करते हुए कहा, “अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने उन पर लाठीचार्ज क्यों किया था? मुकदमा क्यों दर्ज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं?”
उन्होंने कहा कि यदि सपा उन्हें पूजना चाहती है तो पूजे, लेकिन उनकी सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है। “हम कानून का पालन करना भी जानते हैं और करवाना भी जानते हैं,” उन्होंने कहा।
क्या था विवाद-
पुलिस ने मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तट पर वाहन से जाने से रोक दिया था। इसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिससे विवाद खड़ा हो गया। बाद में शंकराचार्य ने स्नान करने से इनकार कर दिया था।
