नयी दिल्ली, 13 फरवरी । राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने पत्रकारों को रेल यात्रा किराये में दी जाने वाली रियायत को बहाल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के सीमित संसाधनों को देखते हुए यह सुविधा लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है।
शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए डांगी ने कहा कि कोविड-19 महामारी से पहले पत्रकारों को रेल किराये में रियायत दी जाती थी, जिसे महामारी के दौरान अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय व्यावहारिक था, लेकिन अब सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि देश में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां पूरी तरह सामान्य हो चुकी हैं और अन्य श्रेणियों को दी जाने वाली रियायतें भी पुनः लागू कर दी गई हैं, इसके बावजूद पत्रकारों को मिलने वाली यह महत्वपूर्ण सुविधा अब तक बहाल नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की भूमिका केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझते हैं और उन्हें सरकार तथा देश के सामने रखते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में काम करना पड़ता है।
डांगी ने कहा कि भारतीय रेल द्वारा दी जाने वाली रियायत कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक सुविधा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित तभी सुनिश्चित हो सकते हैं जब पत्रकार निर्भय, स्वतंत्र और सुलभ साधनों के साथ काम कर सकें।
उन्होंने कहा कि छोटे, स्वतंत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और सरकार को पत्रकारों के लिए रेल यात्रा रियायत शीघ्र बहाल करनी चाहिए।
