अधिक आयकर संग्रह का मतलब मध्यम वर्ग को दबाना नहीं, यह उनके आगे बढ़ने का सबूत: सीतारमण

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (Agency)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि व्यक्तिगत आयकर संग्रह में वृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग पर दबाव डाला जा रहा है, बल्कि यह उनके आर्थिक विस्तार और आय में वृद्धि का संकेत है।

वह वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा का जवाब दे रही थीं। विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्यम वर्ग अमीर और गरीब के बीच फंसा हुआ है, सीतारमण ने कहा कि ऐसा आभास इसलिए होता है क्योंकि व्यक्तिगत आयकर संग्रह अब कॉरपोरेट कर से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा, “पिछले दस वर्षों में किए गए आर्थिक सुधारों के कारण ऐतिहासिक रूप से मध्यम वर्ग का विस्तार हुआ है। व्यक्तिगत आयकर का अधिक संग्रह यह नहीं दर्शाता कि मध्यम वर्ग को दबाया जा रहा है, बल्कि यह दिखाता है कि कर योग्य आय वाले लोगों की संख्या बढ़ी है।”

करदाताओं की संख्या में वृद्धि

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों या टीडीएस के दायरे में आने वालों की संख्या 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई है। पिछले 11 वर्षों में करदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी हुई है, जो औसतन 7.9 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “यह देश में मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा संरचनात्मक विस्तार है। लोग स्वेच्छा से कर देने के लिए आगे आ रहे हैं, न कि इसलिए कि हमने दरें बढ़ाई हैं।”

आयकर सीमा और राहत का उल्लेख

सीतारमण ने कहा कि आयकर छूट की सीमा सभी के लिए 12 लाख रुपये और वेतनभोगी वर्ग के लिए 12.75 लाख रुपये तक बढ़ाई गई है। इसके अलावा मानक कटौती भी बढ़ाई गई है और नई कर व्यवस्था के तहत रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

उन्होंने कहा, “अगर 12.75 लाख रुपये कमाने वाले वेतनभोगी को कर नहीं देना पड़ता, तो मध्यम वर्ग को दबाने की बात कहां से आती है?”

महंगाई और खर्च पर सरकार का पक्ष

वित्त मंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और दरों के युक्तिसंगतीकरण से घरेलू खर्च में कमी आई है। वस्तुओं की कीमतें कम होने से मासिक खर्च पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि महंगाई ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर है और बढ़ती वास्तविक आय के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि मध्यम वर्ग दबाव में है।

विपक्ष पर पलटवार

सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना अर्थव्यवस्था को “मृत” बताने वाले बयान को नकारात्मक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह देश की जनता का मजाक उड़ाने जैसा है, जो भारत की वृद्धि में योगदान दे रही है।

उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज किया कि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय कटौती की गई है। उनके अनुसार, पिछले दस वर्षों में 14 सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये अव्ययित रहे, जबकि संप्रग सरकार के दौरान यह राशि 94,000 करोड़ रुपये थी।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 48 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे हैं और लीकेज रोककर 4.31 लाख करोड़ रुपये की बचत की है।

उन्होंने कहा कि सरकार अत्यधिक कर्ज नहीं ले रही है और कांग्रेस का कर्ज को लेकर बयान “मगरमच्छ के आंसू” बहाने जैसा है।

‘वृहद आर्थिक संतुलन’ पर जोर

सीतारमण ने कहा कि देश इस समय “वृहद आर्थिक संतुलन” के दुर्लभ दौर से गुजर रहा है, जहां उच्च जीडीपी वृद्धि दर और निम्न मुद्रास्फीति साथ-साथ बनी हुई है। उन्होंने इसे पूरे देश की उपलब्धि बताया।

उन्होंने बताया कि बजट 2026-27 में ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ पर एक स्थायी समिति गठित करने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सेवा क्षेत्र के लिए तैयार करना है।

वित्त मंत्री ने राज्यसभा सदस्यों से अपने-अपने राज्यों की सरकारों को बजट में घोषित योजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

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