दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का निधन, टीवी पत्रकारिता के स्वर्णिम दौर का एक अध्याय समाप्त

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (AGENCY)। दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का बृहस्पतिवार को यहां निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं। उनके निधन के साथ भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के उस दौर की एक सशक्त और गरिमामयी आवाज खामोश हो गई, जिसे आज भी दर्शक सम्मान और स्नेह के साथ याद करते हैं।

सरला माहेश्वरी 1976 से 2005 तक दूरदर्शन पर समाचार प्रस्तुति से जुड़ी रहीं और 1980 तथा 1990 के दशक में वह टीवी समाचार जगत का एक जाना-माना चेहरा थीं। उनकी शांत, संयमित और स्पष्ट प्रस्तुति शैली आज के शोरगुल वाले टीवी समाचार वातावरण से बिल्कुल अलग मानी जाती थी। सलमा सुल्तान, मीनू तलवार, शम्मी नारंग, गीतांजलि अय्यर और नीति रविंद्रन जैसे चर्चित समाचार वाचकों के साथ उन्होंने उस दौर में समाचार प्रस्तुति को विश्वसनीयता और गरिमा प्रदान की।

उनका नाम सुनते ही दूरदर्शन के श्वेत-श्याम प्रसारण से रंगीन प्रसारण तक के संक्रमण काल की स्मृतियां ताजा हो जाती हैं—जब प्रसारण सीमित समय के लिए होता था और दर्शकों के पास केवल एक ही चैनल का विकल्प होता था।

सहयोगियों और दर्शकों ने दी श्रद्धांजलि

उनके निधन की जानकारी उनके सह-समाचार वाचक और मित्र शम्मी नारंग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम पर दी। नारंग ने लिखा, “मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि दूरदर्शन में मेरी पूर्व सह-समाचार प्रस्तोता सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है। वह न केवल दिखने में सुंदर थीं बल्कि हृदय से भी उदार थीं, भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वह ज्ञान का भंडार थीं।”

दूरदर्शन नेशनल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “श्रीमती सरला माहेश्वरी दूरदर्शन की एक सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं। अपनी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से उन्होंने भारतीय समाचार जगत में विशेष स्थान बनाया। उनकी सादगी और संयम ने दर्शकों के दिलों में गहरा विश्वास अर्जित किया।”

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “जब टीवी पर अपनी बात रखने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं होती थी। सरला माहेश्वरी दूरदर्शन का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं, जिनकी आवाज हमेशा सुकून देने वाली होती थी। ओम शांति।” पत्रकार सोनल कालरा ने उन्हें उनकी “शालीनता और संयम” के लिए याद किया।

कांग्रेस की केरल इकाई और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम युग का अंत बताया।

मतदान के अधिकार को लेकर थीं सजग

पिछले वर्ष फरवरी में सरला माहेश्वरी तब चर्चा में आई थीं, जब वह एम्बुलेंस से मतदान केंद्र पहुंची थीं और उन्होंने मतदान के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि मतदान हम सभी का अधिकार है। प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़कर अपना वोट डालना चाहिए।”

शिक्षिका के रूप में भी निभाई भूमिका

समाचार वाचन के साथ-साथ सरला माहेश्वरी ने 1970 के दशक में दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी अध्यापन भी किया। खेल लेखक और उनके पूर्व छात्र वी. कृष्णास्वामी ने उन्हें “बहुत धैर्यवान और मिलनसार शिक्षिका” के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को हिंदी समझने में कठिनाई होती थी, उनके प्रति वह विशेष धैर्य और संवेदनशीलता दिखाती थीं।

सादगी और गरिमा की पहचान

सरला माहेश्वरी अपनी विशिष्ट “सीधा पल्ला” साड़ी और सौम्य व्यक्तित्व के लिए भी जानी जाती थीं। वह कभी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास नहीं करती थीं, लेकिन अपनी गरिमामयी उपस्थिति से दर्शकों के मन में स्थायी छाप छोड़ती थीं।

उनके निजी जीवन और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से कम उपलब्ध रही, लेकिन उनके सहयोगियों और दर्शकों के लिए वह विश्वसनीयता, सादगी और पेशेवर उत्कृष्टता की मिसाल बनी रहीं।

सरला माहेश्वरी का निधन भारतीय प्रसारण इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अवसान के रूप में देखा जा रहा है। उनकी शांत और प्रभावशाली आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए पत्रकारिता में संयम और विश्वसनीयता का प्रतीक बनी रहेगी। ओम शांति।

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