सरकार ने अमेरिका के सामने समर्पण किया, ‘भारत माता’ को बेच दिया: राहुल गांधी

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (Agency)- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस समझौते में पूरी तरह समर्पण कर दिया है और कहा कि “उसे शर्म आनी चाहिए कि उसने भारत माता को बेच दिया है।”

केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री इस तरह का समझौता करने को विवश हुए क्योंकि “अमेरिका ने उनकी गर्दन पकड़ रखी है।” सत्तापक्ष के सदस्यों की टोका-टाकी के बीच उन्होंने कहा कि इस समझौते में देश के किसानों के हितों को कुचल दिया गया है, जैसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अमेरिका में एक भारतीय उद्योगपति से जुड़े मामले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित एक प्रकरण का उल्लेख किया, जिस पर पीठासीन सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उक्त टिप्पणियां रिकॉर्ड में शामिल नहीं होंगी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने राहुल गांधी से अपने आरोपों को सत्यापित करने को कहा, जिस पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया कि वह इसके लिए तैयार हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि यदि ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार अमेरिका के साथ बातचीत कर रही होती, तो वह भारतीय डेटा को रणनीतिक पूंजी मानते हुए बराबरी के स्तर पर चर्चा करती। उनका कहना था कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के तहत सरकार ने डिजिटल व्यापार के नियमों पर नियंत्रण छोड़ा, ‘डेटा लोकलाइजेशन’ की शर्त हटाई, अमेरिका को डेटा के मुक्त प्रवाह की अनुमति दी, डिजिटल कर पर सीमा तय की, सोर्स कोड खुलासा करने की शर्त समाप्त की और बड़ी टेक कंपनियों को लंबे समय तक कर में छूट दी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसान एक “भयानक तूफान” का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप था कि सरकार ने “हजारों एकड़ में फैले यांत्रिक अमेरिकी खेतों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं,” जिससे छोटे किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने लोगों, डेटा, खाद्य आपूर्ति और ऊर्जा तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

अपने भाषण में उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वह ऐसे समझौते का बचाव कैसे कर सकती है और आरोप लगाया कि देश के हितों के साथ समझौता किया गया है।

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