उत्तर प्रदेश बजट 2026–27: पूंजीगत विस्तार और सामाजिक संतुलन का सराहनीय प्रयास

स्मिता मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, विद्यांत हिन्दू पीजी कॉलेज, लखनऊ

वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को उच्च विकास दर की दिशा में अग्रसर करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण योजनाओं को सुदृढ़ करने का एक संतुलित प्रयास प्रतीत होता है। 9.12 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट आकार तथा लगभग 19.5 प्रतिशत पूंजीगत व्यय का प्रावधान यह दर्शाता है कि सरकार अवस्थापना विकास और निवेश-प्रधान आर्थिक मॉडल को प्राथमिकता दे रही है।

राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय का बढ़कर 1,09,844 रुपये होना तथा बेरोजगारी दर का घटकर 2.24 प्रतिशत रह जाना, विकास की सकारात्मक प्रवृत्ति को रेखांकित करते हैं। साथ ही लगभग 6 करोड़ लोगों का बहुआयामी गरीबी से बाहर आना सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का संकेत देता है।

कृषि क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना भुगतान, नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली तथा लगभग 95 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है। इससे किसानों की आय में स्थिरता और ग्रामीण मांग में वृद्धि की संभावना मजबूत होती है।

उद्योग और निवेश के मोर्चे पर 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू तथा 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, डिफेंस कॉरिडोर और डेटा सेंटर पार्क जैसी पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश को विनिर्माण और तकनीकी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

महिला और युवा सशक्तिकरण पर केंद्रित योजनाएं सामाजिक पूंजी निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक निवेश का संकेत देती हैं। लगभग 50 लाख टैबलेट का वितरण, 9.25 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण तथा महिला उद्यमिता कार्यक्रम मानव संसाधन विकास को नई दिशा प्रदान करते हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में बढ़ा हुआ आवंटन, विशेषकर मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल है।

ऊर्जा क्षेत्र में सौर, जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन सहित 22,000 मेगावाट क्षमता के लक्ष्य तथा उसके अनुरूप बजटीय प्रावधान राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

राजकोषीय अनुशासन की दृष्टि से सरकार ने राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखने तथा ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विकास और कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए वित्तीय स्थिरता कायम रखना इस बजट की प्रमुख चुनौती होगी।

यदि प्रस्तावित निवेश योजनाएं समयबद्ध और प्रभावी ढंग से क्रियान्वित होती हैं, तो यह बजट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम सिद्ध हो सकता है।

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