यह उप्र सरकार का ‘विदाई’ बजट : अखिलेश यादव

लखनऊ, 11 फरवरी (Agency) — समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का “विदाई बजट” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी और प्रचार के माध्यम से जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नौ लाख 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा बजट बताया गया है।

बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने संवाददाताओं से कहा, “यह विदाई बजट है। इसके साथ ही भाजपा की विदाई भी तय है। इसके बाद अब वे लौटने वाले नहीं हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े बजट आकार का प्रचार कर रही है, जबकि जनता की भलाई के लिए ठोस प्रावधान नहीं हैं।

यादव ने कहा, “यह बजट केवल आकार में बड़ा है। गरीबों, किसानों और नौजवानों को इससे कितना लाभ मिलेगा, यह महत्वपूर्ण है।” उन्होंने सरकार पर पिछले बजट का बड़ा हिस्सा खर्च न कर पाने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि औसतन 50 प्रतिशत बजट भी खर्च नहीं किया जा सका।

उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आवंटित धनराशि का 57 प्रतिशत, ग्राम्य विकास में 36 प्रतिशत, पशुधन में लगभग 60 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 58 प्रतिशत, महिला कल्याण में 53 प्रतिशत और बेसिक शिक्षा में 62 प्रतिशत बजट ही खर्च किया गया।

सपा प्रमुख ने कहा, “जब महत्वपूर्ण विभागों में पूरा बजट खर्च नहीं हो पा रहा है तो यह सरकार की अक्षमता को दर्शाता है।”

अखिलेश यादव ने ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसके अनुरूप कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को 90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना होगा, जबकि सरकार वर्ष 2024-25 में जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ और 2025-26 में 36 लाख करोड़ रुपये होने की बात कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय देश में निचले स्थानों पर है और सरकार वास्तविक स्थिति बताने से बचती है।

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के पास बेरोजगारी दूर करने की स्पष्ट रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि निवेश के अभाव और ठोस फैसलों की कमी के कारण बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव नहीं हो पा रहा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और पुलिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “जब मुकदमे दर्ज नहीं होंगे तो अपराध के आंकड़े अपने आप कम दिखाई देंगे।”

यादव ने आरोप लगाया कि संगठित अपराध में सरकार और पुलिस की मिलीभगत है तथा भाजपा के संकल्प पत्र के वादों को भी भुला दिया गया है।

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