कोलकाता, पांच फरवरी । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच बृहस्पतिवार को पेश किए गए राज्य के अंतरिम बजट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लोककल्याण को प्राथमिकता देने वाली राजनीतिक रणनीति साफ तौर पर झलकती है। नकद हस्तांतरण, बेरोजगारी भत्ता और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए भत्तों में वृद्धि के जरिए महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मियों जैसे प्रमुख मतदाता वर्गों को साधने का प्रयास किया गया है।
राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट विधानसभा में पेश किया। वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत यह बजट पारंपरिक वित्तीय दस्तावेज से अधिक एक चुनावी घोषणापत्र जैसा प्रतीत होता है, जिसमें आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए कई लोकलुभावन प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।
बजट का केंद्रबिंदु महिला मतदाता रहीं, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और 2011 से तृणमूल कांग्रेस की सबसे भरोसेमंद वोट बैंक मानी जाती हैं। सरकार ने फरवरी से ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव किया है, जिसके लिए 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे ऐसी योजना बताया जिसके आधार पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाता सरकार का मूल्यांकन करते हैं, जहां इसे ‘ममता की गारंटी’ के रूप में देखा जाता है।
युवाओं को लुभाने के उद्देश्य से बजट में ‘बंगला युवा साथी’ योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगारों को नौकरी मिलने तक या अधिकतम पांच वर्षों के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह भत्ता दिया जाएगा। यदि तृणमूल कांग्रेस सत्ता में लौटती है तो यह योजना 15 अगस्त से लागू की जाएगी।
अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए भी राहत की घोषणाएं की गईं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के भत्ते में 1,000 रुपये की वृद्धि के साथ उनकी मृत्यु की स्थिति में पांच लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 280 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं को भी 1,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त देने का प्रस्ताव है।
नागरिक स्वयंसेवकों और ‘ग्रीन पुलिसकर्मियों’ के लिए भी 1,000 रुपये की मासिक वेतन वृद्धि की घोषणा की गई, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सरकारी कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ते में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी का लाभ मिला, जो लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की मांग रही थी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट को ‘जनहितैषी’ और ‘वित्तीय अनुशासन का उदाहरण’ बताया। उन्होंने केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य का बजट आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देता है, जबकि केंद्र का बजट दिशाहीन और सिद्धांतविहीन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल का लगभग दो लाख करोड़ रुपये का वैध बकाया है, जो मनरेगा, ग्रामीण आवास, ग्रामीण सड़कों और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के तहत वर्षों से लंबित है।
वहीं, विपक्षी भाजपा ने बजट को चुनावी हथकंडा करार दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इसे ‘झूठा और लक्ष्यहीन दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना की राशि बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जाएगा और इसे 3,000 रुपये प्रतिमाह तक किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार बनने पर छह महीने के भीतर रोजगार से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
