सच्चाई सामने आने से डर रही है सरकार, इसलिए राहुल को बोलने नहीं दे रही: प्रियंका गांधी

नयी दिल्ली, चार फरवरी – कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दे रही है, क्योंकि वह चीन के साथ सैन्य तनाव के समय की कथित सच्चाई सामने आने से डर रही है।

प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि सरकार सदन की कार्यवाही को अपनी सुविधा के अनुसार संचालित करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को प्रकाशित पुस्तक से उद्धरण देने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि अन्य सदस्यों को विभिन्न पुस्तकों का हवाला देने की छूट दी जा रही है।

उन्होंने कहा, “जब मोदी सरकार सदन को बाधित करना चाहती है तो भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को बोलने के लिए खड़ा कर देती है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रकाशित किताब से उद्धरण देने नहीं दिया गया, जबकि निशिकांत दुबे कई किताबों का हवाला देते हैं और उनका माइक बंद नहीं किया जाता।”

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि यह लोकसभा अध्यक्ष पद, संसद और लोकतंत्र का निरादर है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष केवल एक व्यक्ति नहीं होते, बल्कि पूरे विपक्ष और उन करोड़ों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने विपक्षी दलों को वोट दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर नेहरू जैसे ऐतिहासिक मुद्दों को बार-बार उठाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी ने सोमवार और मंगलवार को लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए चीन से जुड़े मुद्दे उठाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें आसन से इसकी अनुमति नहीं मिली। हालांकि, उन्होंने मंगलवार को संबंधित लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रखा। इस मुद्दे को लेकर संसद में गतिरोध बना हुआ है।

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि नरवणे के संस्मरण में चीन के साथ सैन्य तनाव के दौरान सरकार और शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि यह जानकारी सार्वजनिक हो।

इस बीच, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू समेत कांग्रेस के पूर्व नेताओं पर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए और कई पुस्तकों का हवाला दिया।

प्रियंका गांधी ने कहा कि चीन के साथ तनाव के दौरान सरकार निर्णय लेने में असमर्थ रही और बाद में सैन्य नेतृत्व पर जिम्मेदारी छोड़ दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर चर्चा से बच रही है।

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