नयी दिल्ली, 4 फरवरी – राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के किसानों के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है, लेकिन इस महत्वपूर्ण समझौते की जानकारी सांसदों को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से मिल रही है, जो संसद का सीधा अपमान है।
उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान खरगे ने कहा कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह किसान-विरोधी है और इससे भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कृषि मंत्री स्वयं यह कह चुके हैं कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को लाभ होगा, जबकि भारत में सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर रही है।
खरगे ने हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई विभिन्न टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि यह भारत की संप्रभुता पर भी हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति पूरी तरह विफल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल और चीन आपस में नजदीक आ रहे हैं, नेपाल विभिन्न क्षेत्रों पर अपना दावा कर रहा है और चीन भी भारतीय इलाकों को लेकर दावे कर रहा है।
उन्होंने कहा कि 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
खरगे ने गुजरात के बंदरगाहों पर भारी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि गुजरात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है, फिर भी वहां एक उद्योगपति से जुड़े बंदरगाहों पर इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ पकड़े जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तीकरण समेत कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में 6,062 शब्द हैं, लेकिन कई अहम सवालों पर सरकार मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर किया है।
महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर खरगे ने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री वास्तव में महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना जैसी शर्तों के बिना तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
खरगे ने कहा कि सौ साल पहले, जब महिलाओं को वोट का अधिकार भी नहीं था, तब कांग्रेस ने सरोजनी नायडू को पार्टी अध्यक्ष चुना था और इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के 60 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अब तक किसी महिला को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी सौ वर्षों में किसी महिला को नेतृत्व नहीं सौंपा।
उन्होंने कमजोर तबकों, विशेषकर आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस सरकारों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के आर्थिक विकास के लिए कई ठोस कदम उठाए थे।
सांप्रदायिक सौहार्द और सहिष्णुता के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए खरगे ने ‘मोहम्मद दीपक’ नाम रखने वाले एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग सामाजिक सद्भाव के लिए खड़े होते हैं, उन्हीं को धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने मनरेगा कानून के स्थान पर लाए गए नए कानून का विरोध करते हुए मूल स्वरूप में मनरेगा को फिर से लागू करने की मांग की।
