विपक्ष ने वीबी–जी राम जी और एसआईआर पर चर्चा की मांग की, सरकार ने किया इनकार

नयी दिल्ली, 27 जनवरी । संसद के बुधवार से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। विपक्षी दलों द्वारा ‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग को सरकार ने मंगलवार को खारिज कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि इन दोनों विषयों पर पहले ही संसद में विस्तार से चर्चा हो चुकी है और अब सरकार “रिवर्स गियर” में नहीं जा सकती।

बजट सत्र से एक दिन पहले सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, माकपा सहित कई विपक्षी दलों ने इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग उठाई। बैठक के दौरान कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सत्र के लिए सरकारी कामकाज का एजेंडा पहले से साझा नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई। इस पर रीजीजू ने कहा कि यह सूची उचित समय पर साझा की जाएगी और आमतौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद ही सरकारी विधायी एजेंडा सामने रखा जाता है।

विपक्ष का कहना है कि वह बजट सत्र के दौरान एसआईआर, मनरेगा की जगह लाए गए विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ, विदेश नीति, वायु प्रदूषण, अर्थव्यवस्था की स्थिति, रुपये में गिरावट, किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा चाहता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि बीते शीतकालीन सत्र में विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम पारित किया जा चुका है और उस समय इस पर पर्याप्त बहस हुई थी।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की मांग पर रीजीजू ने कहा कि पिछले सत्र में संसद के दोनों सदनों में चुनाव सुधारों पर “मैराथन चर्चा” कराई गई थी, जिसमें सभी दलों को पूरा अवसर मिला था। ऐसे में दोबारा उसी विषय पर बहस की मांग उचित नहीं है।

रीजीजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील करते हुए कहा कि सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट पर चर्चा के दौरान अपने मुद्दे उठा सकते हैं, लेकिन हंगामा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में चुने गए प्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे अपनी बात रखें और दूसरों की बात भी सुनें।

वहीं विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह सरकार की आर्थिक और विदेश नीति को लेकर आक्रामक रुख अपनाएगा। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, रुपये की गिरावट, वायु प्रदूषण, मनरेगा, बेरोजगारी और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।

अन्य दलों ने भी अपने-अपने मुद्दे सामने रखे हैं। तेलुगु देसम पार्टी ने मुक्त व्यापार समझौतों और अमरावती को कानूनी दर्जा देने की मांग की, जबकि बीजू जनता दल ने ओडिशा में किसानों की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को उठाने की बात कही। ऐसे में बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं।

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