नई दिल्ली, 26 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह के दौरान भारतीय सेना के तीनों अंगों—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—की संयुक्त झांकी के माध्यम से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की निर्णायक जीत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। झांकी में राफेल और सुखोई सु-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, एस-400 वायु रक्षा प्रणाली सहित कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को दर्शाया गया, जिन्हें पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात किया गया था।
परेड के दौरान एक विशेष ट्रेलर पर कांच के आवरण में एकीकृत परिचालन केंद्र का मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसी शक्तिशाली हथियार प्रणालियों के माध्यम से निर्णायक सैन्य कार्रवाई को दर्शाया गया। इसी के साथ भारत की महत्वाकांक्षी ‘सुदर्शन चक्र’ योजना की प्रतीकात्मक झलक भी दिखाई गई, जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण वायु सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की थी।
ट्रेलर के पिछले हिस्से में ब्रह्मोस मिसाइलों को दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते हुए दिखाया गया, जबकि अर्धगोलाकार कांच के कवच के भीतर सैन्यकर्मी और नागरिक सुरक्षा के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किए गए। परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें, ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर प्रणाली, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन तथा नवगठित शक्तिबाण रेजिमेंट सहित भारत की अग्रिम पंक्ति की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
फ्लाईपास्ट के दौरान वायुसेना के विमानों ने तीर के आकार की विशेष संरचना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का संदेश दिया। सेना के तीनों अंगों की संयुक्त झांकी, जो सैन्य मामलों के विभाग की ओर से प्रस्तुत की गई थी, को दो भागों में विभाजित किया गया—एक ओर अभियान में निर्णायक भूमिका निभाने वाले घातक हथियार और दूसरी ओर दुश्मन के बुनियादी ढांचे के विध्वंस का दृश्य।
वायुसेना मुख्यालय ने ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’ विषय पर झांकी प्रस्तुत की, जिसमें सेवा के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों के योगदान को सम्मानित किया गया। झांकी में अमर जवान ज्योति, टी-55 और विजयंत टैंक, मिग-21, मिराज-2000 और जगुआर विमानों के 3डी मॉडल, आईएनएस मैसूर और आईएनएस राजपूत सहित 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध की झलक दिखाई गई।
नौसेना की झांकी ‘मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना’ विषय पर आधारित रही, जिसमें प्राचीन समुद्री विरासत से लेकर आधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों तक की यात्रा को दर्शाया गया। इसमें पांचवीं शताब्दी के जहाज आईएनएसवी कौंडिन्य, मराठा नौसेना के गुरब श्रेणी के जहाज तथा आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि को प्रदर्शित किया गया। साथ ही ‘नविका सागर परिक्रमा-2’ अभियान के दौरान पोत तारिणी द्वारा किए गए विश्व भ्रमण का चित्रण भी किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष की झांकियों का व्यापक विषय ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ रहा, जो ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और देश की सांस्कृतिक विविधता के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति को रेखांकित करता है।
