होसबाले ने संवैधानिक मूल्यों और भारत के शाश्वत आध्यात्मिक सार की रक्षा का किया आह्वान

नयी दिल्ली, 26 जनवरी । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि गणतंत्र दिवस भारत के राष्ट्रध्वज और संवैधानिक मूल्यों के साथ-साथ देश के प्राचीन और शाश्वत आध्यात्मिक सार की रक्षा और संवर्धन की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर यहां केशव कुंज स्थित आरएसएस कार्यालय में राष्ट्रध्वज फहराने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबाले ने लोगों से अपने जीवन में भारत के शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने, नागरिक कर्तव्यों का पालन करने और राष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप आचरण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के प्रति प्रेम और करुणा तथा कमजोर वर्गों के प्रति स्नेह और सहानुभूति विकसित करने की भी अपील की।

होसबाले ने कहा, “हम भारतीय गर्व के साथ अपने गौरवशाली और जीवंत गणराज्य के नागरिक हैं। गणतंत्र दिवस हमारे लिए अत्यंत पवित्र दिन है। यह दिन राष्ट्रध्वज, संविधान और देश के शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों की निरंतर रक्षा और संवर्धन की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।”

उन्होंने कहा कि संविधान और तिरंगे की रक्षा करना राष्ट्रीय कर्तव्य है, क्योंकि इनकी नींव सत्य और धर्म पर आधारित है। होसबाले ने कहा, “आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत के शाश्वत आध्यात्मिक आदर्शों को अपनाकर अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। संविधान की रक्षा, भारत की एकता और सीमाओं की सुरक्षा हमारे सर्वोच्च राष्ट्रीय कर्तव्य हैं।”

आरएसएस सरकार्यवाह ने कहा कि भारतीय सेना, सुरक्षा बलों, पुलिस और समाज द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थानों ने भारत गणराज्य को सुरक्षित और संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ये संस्थान कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण के साथ देश की प्राचीन विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी योगदान दे रहे हैं।

होसबाले ने जोर देकर कहा कि भारत गणराज्य की रक्षा के लिए समाज के प्रति प्रेम और करुणा तथा कमजोर लोगों के प्रति स्नेह और सहानुभूति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र और हर आयाम में देश के विकास के लिए निरंतर प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से इस ‘साधना’ में लगे हुए हैं, जिसका उद्देश्य गणराज्य की रक्षा करना, समाज की सेवा करना और भारत के ‘राष्ट्र धर्म’ से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना है।

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में होसबाले ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान ‘वंदे मातरम्’ बजाने के सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देश का राष्ट्रीय गीत है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् की हर पंक्ति और हर शब्द हर पीढ़ी के लिए देश के प्रति समर्पण और सेवा की प्रेरणा है। ऐसे अवसर पर इसे प्रस्तुत करना सराहनीय कदम है।”

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