नयी दिल्ली, 25 जनवरी । भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान करने की मंजूरी दी।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने पिछले वर्ष जून में ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी और इस प्रकार वे अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने। उनकी यह 18 दिवसीय अंतरिक्ष यात्रा, वर्ष 1984 में राकेश शर्मा की सोवियत सोयूज मिशन के तहत ऐतिहासिक उड़ान के 41 वर्षों बाद संपन्न हुई।
सरकार का यह निर्णय अंतरिक्ष क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करता है, क्योंकि अशोक चक्र सामान्यतः उन सैन्य कर्मियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अत्यंत विशिष्ट वीरता, साहस और असाधारण कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय वायुसेना में एक लड़ाकू विमान पायलट के रूप में की थी। उन्हें सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे विमानों को उड़ाने का लगभग 2,000 घंटे का अनुभव है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के 70 कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की भी मंजूरी दी, जिनमें से छह को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। इन पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, एक मरणोपरांत सहित 13 शौर्य चक्र, एक ‘बार टू सेना पदक’ (वीरता), 44 सेना पदक (वीरता), छह नौसेना पदक (वीरता) और दो वायुसेना पदक (वीरता) शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने वाले कर्मियों में असम राइफल्स के मेजर अर्शदीप सिंह, द्वितीय पैरा (विशेष बल) के नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को शामिल किया है। ग्रुप कैप्टन नायर उन चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं, जो भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों — लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए — को शौर्य चक्र से सम्मानित करने की भी घोषणा की गई। दोनों अधिकारियों ने नौसेना के पोत आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर आठ महीनों में लगभग 21,600 समुद्री मील (40,000 किमी) की दूरी तय कर विश्व परिक्रमा कर इतिहास रचा था।
अशोक चक्र और कीर्ति चक्र के बाद शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। घोषित 13 शौर्य चक्र पुरस्कारों में से 10 थल सेना कर्मियों को, दो नौसेना कर्मियों को और एक अर्धसैनिक बल के अधिकारी को प्रदान किए जाएंगे, जिनमें एक मरणोपरांत सम्मान भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों और अन्य कर्मियों को 301 विशिष्ट सेवा पदकों से सम्मानित करने की भी मंजूरी दी है। इनमें 30 परम विशिष्ट सेवा पदक, चार उत्तम युद्ध सेवा पदक, 56 अति विशिष्ट सेवा पदक, नौ युद्ध सेवा पदक और विभिन्न श्रेणियों के अन्य पदक शामिल हैं।
