अनिश्चित वैश्विक माहौल में भारत के युवाओं को हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए: राजनाथ सिंह

नयी दिल्ली, 24 जनवरी । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि जब पूरी दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत के युवाओं को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत रहना चाहिए तथा हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

दिल्ली छावनी में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर के दौरान कैडेटों को संबोधित करते हुए सिंह ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की “कठोर और निर्णायक कार्रवाई” का उल्लेख किया। उन्होंने कैडेटों से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

रक्षा मंत्री ने एनसीसी कैडेटों को देश की “दूसरी रक्षा पंक्ति” बताते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी ढांचों को नष्ट कर पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया।
उन्होंने कहा, “हमारे सैनिकों ने साहस और संयम का परिचय दिया। हमने केवल उन्हीं तत्वों को निशाना बनाया, जिन्होंने हमें नुकसान पहुंचाया। यह अनुशासन और शक्ति इसलिए संभव हो पाई, क्योंकि हमारे जवान शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सुदृढ़ हैं।”

सिंह ने युवाओं की तुलना महाभारत के वीर अभिमन्यु से करते हुए कहा कि आज का भारतीय युवा किसी भी ‘चक्रव्यूह’ में प्रवेश करने और उससे विजयी होकर निकलने की क्षमता रखता है। उन्होंने एनसीसी कैडेटों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

रक्षा मंत्री ने कहा, “हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां युवाओं से अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। वे राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।”

उन्होंने आधुनिक जीवनशैली का जिक्र करते हुए कहा कि आज की दुनिया सुविधा और आराम बेच रही है—चाहे वह वीडियो गेम हों या फूड डिलीवरी जैसी सेवाएं। लेकिन एनसीसी की परेड, ड्रिल और शिविर कैडेटों को अपने ‘कम्फर्ट ज़ोन’ से बाहर निकालते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।

सिंह ने कैडेटों को यह भी सलाह दी कि वे विभिन्न जीवन कौशल सीखें, जो आपदाओं और आपात स्थितियों में न केवल स्वयं की, बल्कि दूसरों की जान बचाने में भी सहायक हो सकते हैं।

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