नयी दिल्ली, 22 जनवरी । पंजाब कांग्रेस में जारी कलह के बीच पार्टी नेतृत्व ने बृहस्पतिवार को राज्य के नेताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी और किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, पार्टी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास ‘10 राजाजी मार्ग’ पर करीब तीन घंटे चली बैठक में खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग सहित अन्य नेता शामिल हुए।
यह बैठक हाल में चन्नी से जुड़े एक वीडियो के सामने आने के बाद बुलाई गई, जिसमें उन्होंने पार्टी में दलितों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया था। हालांकि, चन्नी ने बाद में कहा कि उनकी टिप्पणी किसी विशेष जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं थी।
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, “खरगे जी और राहुल जी ने पंजाब के प्रत्येक नेता की बात ध्यान से सुनी। यह एक सार्थक चर्चा रही। नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि आंतरिक मुद्दों पर मीडिया या सोशल मीडिया में कोई बयानबाजी नहीं की जाएगी—इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए वेणुगोपाल ने दो टूक कहा, “नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं है।”
चन्नी द्वारा उठाए गए प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस सभी समुदायों—विशेषकर एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के गरीबों—के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है। “यह पार्टी की अखिल भारतीय लाइन है और पंजाब में भी लागू है। लेकिन मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए इस तरह की बातों से संगठन को मदद नहीं मिलती,” उन्होंने कहा।
भूपेश बघेल ने कहा कि बैठक में आने वाले वर्ष की रणनीति पर चर्चा हुई और अनुशासन को लेकर शीर्ष नेतृत्व ने कड़े निर्देश दिए हैं। “पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” उन्होंने कहा।
सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व ने चन्नी की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई और भविष्य में इस तरह के सार्वजनिक बयान न देने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि चन्नी ने हाल ही में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक में कहा था कि पंजाब में दलितों की आबादी 35–38 प्रतिशत होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वडिंग ने ‘जात-पात’ की राजनीति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था।
बैठक के अंत में नेताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन किया और कहा कि उम्मीदवार चयन, प्रचार और अन्य निर्णय उचित समय पर किए जाएंगे। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं।
