नयी दिल्ली, 22 जनवरी । दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान किया है।
राउज एवेन्यू जिला अदालत ने जनकपुरी क्षेत्र में दंगों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपों से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने जारी बयान में कहा कि एक और दो नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या की गई थी। इस मामले में पांच गवाहों ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा था कि हत्याओं के लिए जिम्मेदार भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे। इसके बावजूद अदालत द्वारा उन्हें बरी किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि फैसले की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद उसका विधिवत अध्ययन किया जाएगा और इसके पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाएगी। डीएसजीएमसी ने भरोसा जताया कि उच्च न्यायालय में गवाहों के बयानों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
डीएसजीएमसी ने बताया कि इस मामले के मुख्य गवाह रविंदर सिंह कोहली का निधन हो चुका है, जिसके कारण उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी। कोहली की मौजूदगी में ही अवतार सिंह और सोहन सिंह की हत्या की गई थी, जिससे उनकी गवाही मामले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
समिति ने कहा कि 42 वर्ष बाद भी आरोपी को बरी किया जाना सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाता है। डीएसजीएमसी का आरोप है कि सज्जन कुमार ने अपने तत्कालीन संसदीय क्षेत्र पश्चिम दिल्ली में भीड़ को उकसाने में अहम भूमिका निभाई थी। समिति ने यह भी कहा कि अन्य मामलों में सज्जन कुमार को मिली आजीवन कारावास की सजा इस बात का प्रमाण है कि दंगों के दौरान वही भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।
