भारत इसलिए सशक्त बनना चाहता है कि कोई उस पर शर्तें न थोप सके: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

बेंगलुरु, 21 जनवरी । उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि भारत दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनने की दिशा में इसलिए आगे बढ़ रहा है ताकि कोई भी देश उस पर अपनी शर्तें थोपने का साहस न कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की यह शक्ति आकांक्षा न तो किसी पर प्रभुत्व जमाने के लिए है और न ही अन्य देशों पर अनुचित नियम थोपने के उद्देश्य से, बल्कि आत्मसम्मान और संप्रभुता की रक्षा के लिए है।

सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा, “हम सबसे शक्तिशाली बनना चाहते हैं ताकि भारत माता पर कोई भी अपनी शर्तें थोपने की हिम्मत न कर सके।”

राधाकृष्णन ने कहा कि भारत आज केवल नई तकनीकों को अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि प्रौद्योगिकी के निर्माता के रूप में उभर रहा है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने देश में नवाचार और उद्यमशीलता के लिए एक मजबूत और अनुकूल वातावरण तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ है, जिनमें जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा के खतरे, प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक उपयोग प्रमुख हैं। हालांकि, उपराष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि यही चुनौतियां नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व के लिए बड़े अवसर भी प्रदान करती हैं।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे रचनात्मक, नैतिक, साहसी, आत्मविश्वासी और मानसिक रूप से मजबूत बनें। उन्होंने छात्रों से कभी हार न मानने का आग्रह करते हुए कहा कि किस्मत हर बार साथ नहीं देती, लेकिन कड़ी मेहनत के दम पर जीवन में कम से कम एक बार सफलता अवश्य मिलती है और वही क्षण सबसे सुखद होता है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को लक्ष्य निर्धारण और आत्मविश्वास का महत्व समझाते हुए कहा कि उन्हें अपनी गति से लगातार लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए और कभी भी स्वयं की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, लगन और निरंतर परिश्रम से भले ही तत्काल सफलता न मिले, लेकिन भविष्य में उससे भी बड़ी सफलता अवश्य मिलती है, जिसे कोई भी शक्ति छीन नहीं सकती।

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