वायु प्रदूषण पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश

नयी दिल्ली, 18 जनवरी । कांग्रेस ने वायु प्रदूषण पर विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कब तक इस गंभीर समस्या की सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार करती रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार गंगा के मैदानी क्षेत्रों और हिमालय की तलहटी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 10 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो रही है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट ‘ए ब्रीथ ऑफ चेंज’ व्यापक और साक्ष्य-आधारित है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यह रिपोर्ट बिल्कुल सही समय पर आई है और इसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का भी हर साल करीब 10 प्रतिशत नुकसान हो रहा है।

रमेश ने कहा कि हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण से जुड़ा स्वास्थ्य संकट अत्यंत गंभीर हो गया है। इसे देखते हुए कांग्रेस ने कई ठोस सुझाव दिए हैं, जिनमें वायु प्रदूषण से जुड़े नियमों और मानकों को बिना किसी ढील या छूट के सख्ती से लागू करना शामिल है।

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में कोयला आधारित बिजलीघरों के उत्सर्जन मानकों का सख्ती से पालन कराने, सबसे पुरानी इकाइयों को शीघ्र बंद करने, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और उसके विद्युतीकरण, तथा वाहन उत्सर्जन और ईंधन मानकों को और कठोर बनाने की सिफारिश की गई है।

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि कांग्रेस 1981 के वायु प्रदूषण (नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम और 2009 के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) की समीक्षा का सुझाव दे रही है, जिसमें विशेष रूप से पीएम 2.5 पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे को बजट और भौगोलिक क्षेत्र दोनों स्तरों पर बढ़ाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन के मापदंड के रूप में पीएम 2.5 स्तर को शामिल किया जा सके।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार गंगा के मैदानी क्षेत्रों और हिमालय की तलहटी में वायु प्रदूषण दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य और विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग एक अरब लोग रोजाना खतरनाक स्तर की प्रदूषित हवा के संपर्क में आते हैं, जिससे औसतन जीवन प्रत्याशा तीन साल से अधिक घट रही है।

कांग्रेस नेता की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय राजधानी में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच आई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं।

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