ट्रांसफार्मर हादसे के बाद संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल से उपचार, सहायता और जवाबदेही की मांग

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल से पीड़ित बच्चे को उपचार, परिवार को सहायता और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

लखनऊ। सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व की कसौटी केवल वक्तव्यों से नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, मानवीय संवेदनशीलता और ठोस कार्रवाई से तय होती है। सरोजनीनगर क्षेत्र में हुए एक दुखद हादसे के बाद विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की सक्रिय पहल ने इसी उत्तरदायी नेतृत्व की मिसाल पेश की है।

दिनांक 11 जनवरी 2026 को बिजनौर स्थित सैनिक विहार कॉलोनी में खुले और असुरक्षित विद्युत ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से आठ वर्षीय अर्पित पाल  (पुत्र श्री राकेश पाल) गंभीर रूप से झुलस गया। घटना की सूचना मिलते ही बच्चे के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई और के.जी.एम.यू., लखनऊ में तत्काल चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अब तक लगभग ₹75,000 की चिकित्सा सहायता डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके साथ ही उनकी टीम के सदस्यों ने रक्तदान कर पीड़ित परिवार को चिकित्सकीय और नैतिक सहयोग भी प्रदान किया।

पीड़ित परिवार मूल रूप से मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र का निवासी होने के कारण संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने मोहनलालगंज के माननीय विधायक को पत्र लिखकर विधायक निधि से आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का औपचारिक अनुरोध किया है, ताकि बच्चे का इलाज बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस हादसे को महज एक दुर्घटना मानकर सीमित न रखते हुए प्रशासनिक जवाबदेही से भी जोड़ा है। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को शासन स्तर से समुचित सहायता एवं मुआवजा दिए जाने की मांग की है। वहीं ऊर्जा मंत्री को भेजे गए पत्र में एफआईआर दर्ज कराने, निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने तथा क्षेत्र में मौजूद अन्य असुरक्षित ट्रांसफार्मरों की पहचान कर उनकी फेंसिंग व सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए कड़े सुरक्षा मानकों का पालन तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि संवेदनशीलता, संवैधानिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक दृढ़ता के समन्वय से ही पीड़ितों को त्वरित राहत, न्याय और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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