आई-पैक परिसर में मुख्यमंत्री नहीं, तृणमूल अध्यक्ष के तौर पर गई थी: ममता बनर्जी

नयी दिल्ली, 15 जनवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में स्पष्ट किया कि वह ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के परिसर में मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में गई थीं। उन्होंने बताया कि तृणमूल के चुनावी कार्य का जिम्मा संभाल रहे प्रतीक जैन के कार्यालय में कुछ अनधिकृत व्यक्तियों के घुसने की सूचना मिलने के बाद वह वहां पहुंची थीं।

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ को बताया कि आई-पैक पश्चिम बंगाल में चुनावी कार्य संभालता है और पार्टी ने वर्ष 2021 में इसके साथ एक औपचारिक अनुबंध किया था। सिब्बल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस तथ्य से अवगत था कि आई-पैक के पास पार्टी से संबंधित बड़ी मात्रा में डेटा मौजूद है।

सिब्बल ने सवाल उठाया कि चुनावों के दौरान ईडी द्वारा आई-पैक परिसर में छापा मारने की क्या आवश्यकता थी, जबकि कोयला घोटाले से जुड़े मामले में अंतिम बयान 24 फरवरी 2024 को दर्ज किया जा चुका था। उन्होंने कहा, “यदि जांच एजेंसी चुनाव के बीच इस तरह डेटा अपने कब्जे में ले लेगी, तो पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी?”

उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल अध्यक्ष को पार्टी से जुड़े कार्यालय में जाने का पूरा अधिकार है और ईडी को उस हिस्से में प्रवेश करने की जरूरत नहीं थी, जहां चुनाव संबंधी समस्त जानकारी रखी गई है। सिब्बल ने ईडी की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में होनी चाहिए और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के पास अधिकार क्षेत्र है।

मुख्यमंत्री द्वारा जांच में बाधा डालने के ईडी के आरोपों का खंडन करते हुए सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कोई उपकरण ले जाने का आरोप निराधार है और ईडी के अपने पंचनामे से ही इसकी पुष्टि होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही जांच के नाम पर हस्तक्षेप का एक चलन बन गया है।

राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री को ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए उनके आई-पैक परिसर में प्रवेश करने के दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का साथ होना सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा था।

इस दौरान उच्चतम न्यायालय ने ईडी के उस आरोप को “बेहद गंभीर” बताया, जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने उसकी जांच में बाधा डाली। न्यायालय ने यह समीक्षा करने पर सहमति जताई कि क्या किसी गंभीर अपराध की जांच में राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां केंद्रीय एजेंसी के कार्य में हस्तक्षेप कर सकती हैं।

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी, जिन्होंने आठ जनवरी को आई-पैक कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। साथ ही, राज्य पुलिस को छापेमारी से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि आठ जनवरी को कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान आई-पैक कार्यालय में छापे के समय मुख्यमंत्री वहां पहुंचीं और जांच से जुड़े “महत्वपूर्ण” साक्ष्य अपने साथ ले गईं। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ईडी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

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