आई-पैक छापा मामला: भाजपा ने ईडी याचिका पर शीर्ष अदालत की टिप्पणी को ममता बनर्जी पर ‘गंभीर आरोप’ बताया

नयी दिल्ली, 15 जनवरी : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कोलकाता स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को कथित रूप से बाधित किए जाने के मामले में दाखिल याचिका पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर “गंभीर आरोप” करार दिया है।

केंद्र में सत्तारूढ़ और पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कथित कोयला तस्करी और धनशोधन के आरोपियों को बचाने के लिए राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल किया। भाजपा की यह प्रतिक्रिया उस समय आई, जब शीर्ष अदालत ने ईडी की छापेमारी में बाधा डालने के आरोपों को “बेहद गंभीर” बताते हुए इस सवाल पर सुनवाई करने पर सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।

उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगाते हुए राज्य पुलिस को छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। यह प्राथमिकी आठ जनवरी को आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ईडी की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में आई-पैक परिसर में छापेमारी के दौरान कथित रूप से बाधा डालने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

भाजपा के पश्चिम बंगाल मामलों के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर एक गंभीर आरोप है।” उन्होंने कहा कि न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए माना है कि याचिका में राज्य एजेंसियों द्वारा ईडी की जांच में कथित हस्तक्षेप के गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।

मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी है कि गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसियों के काम में बाधा डालने से अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई मुख्यमंत्री कोयला तस्करी और धनशोधन के आरोपियों को बचाने तथा केंद्रीय एजेंसियों को डराने-धमकाने के लिए राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करता है, तो उच्चतम न्यायालय का हस्तक्षेप “अपरिहार्य” हो जाता है।

भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आई-पैक परिसर में ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी का आचरण सुशासन का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि ईडी ने कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत आई-पैक के कोलकाता कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। जांच एजेंसी का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं परिसर में दाखिल हुईं और जांच से संबंधित “महत्वपूर्ण” दस्तावेज अपने साथ ले गईं।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसी पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। राज्य पुलिस ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की है।

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