नयी दिल्ली, 14 जनवरी – भ्रष्टाचार-रोधी निकाय लोकपाल ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार की शिकायत खारिज करते हुए उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को “निराधार” और “परेशान करने वाले” करार दिया है।
लोकपाल ने अपने 134 पृष्ठों के आदेश में कहा कि इस मामले के शिकायतकर्ता, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर, सांसद के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों के समर्थन में कार्यवाही योग्य ठोस तथ्य प्रस्तुत करने में विफल रहे।
न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल पीठ ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा,
“प्रतिवादी लोक सेवक (आरपीएस) के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और परेशान करने वाले हैं।”
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता ने पूछे गए सवालों से बचने की रणनीति अपनाई।
आजाद अधिकार सेना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने पिछले वर्ष मई में निशिकांत दुबे के खिलाफ लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था।
आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावों के दौरान दुबे द्वारा दाखिल हलफनामों पर भरोसा किया और मामले के आगे बढ़ने के साथ अपनी शिकायत में आरोपों को बार-बार संशोधित किया।
ठाकुर ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि उक्त अवधि के दौरान सांसद की चल-अचल संपत्ति लगभग स्थिर रही, जबकि “उनकी पत्नी अनामिका गौतम की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई”।
हालांकि, दुबे ने अपने जवाब में शिकायत को पूरी तरह निराधार बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी परामर्श सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में एक पेशेवर हैं और नियमित रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करती रही हैं।
गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर इस समय उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला जेल में बंद हैं। उन्हें पिछले वर्ष 9–10 दिसंबर की दरमियानी रात गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1999 में देवरिया के पुलिस अधीक्षक रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पत्नी के नाम पर एक औद्योगिक भूखंड हासिल किया था।
