जालना। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को हथियार मुहैया कराने के बावजूद सरकार चीनी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित कर रही है। ओवैसी ने इसे भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया।
जालना नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर आयोजित रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के दौरान चीन ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया और उसे हथियार दिए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के करीब 80 प्रतिशत सैन्य उपकरण चीन से प्राप्त किए गए हैं। इसके बावजूद भारत सरकार द्वारा चीनी कंपनियों को निवेश का न्योता दिया जाना समझ से परे है।
ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह बार-बार भारत का अपमान और उपहास कर रहे हैं, लेकिन भाजपा नेतृत्व इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने सवाल किया, “भाजपा का राष्ट्रवाद आखिर कहां चला गया?”
एआईएमआईएम प्रमुख ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद भारत में शरण दिए जाने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमानों को अक्सर बांग्लादेशी कहा जाता है, लेकिन जब शेख हसीना को शरण दी जाती है तो इस पर कोई सवाल नहीं उठता।
ओवैसी ने दावा किया कि देश में कई मुस्लिम युवा बिना मुकदमे के वर्षों से जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि जमानत से इनकार करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने छात्र कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम की लंबी कैद के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यूएपीए में कांग्रेस द्वारा किए गए संशोधनों के कारण लंबी हिरासत संभव हो पाई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों का असली चेहरा सामने आ गया है और दलितों व मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए ये दल भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
रैली के अंत में ओवैसी ने मुसलमानों से केवल मतदाता बनकर न रहने की अपील की और कहा कि उन्हें अपना नेतृत्व खुद तैयार करना होगा। उन्होंने कहा, “आपका इस्तेमाल किया गया और आपको गुलाम बनाकर रखा गया।”
ओवैसी के आरोपों पर फिलहाल न तो केंद्र सरकार और न ही भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।
