आगामी 20–30 वर्षों में भारत विश्वगुरु बनकर सुख-शांति देने वाला राष्ट्र बनेगा: मोहन भागवत

मोहन भागवत वृंदावन में सुदामा कुटी आश्रम द्वारा आयोजित रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामानन्दाचार्य की 726वीं जयंती तथा सुदामा कुटी के संस्थापक संत सुदामा दास के वृंदावन आगमन के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे

वृंदावन में रामानन्दाचार्य जयंती एवं सुदामा कुटी शताब्दी समारोह में बोले संघ प्रमुख

मथुरा (उप्र), 10 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि आने वाले 20 से 30 वर्षों में भारत विश्वगुरु के रूप में स्थापित होकर पूरी दुनिया को सुख-शांति और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाने वाला राष्ट्र बनेगा।

वह वृंदावन में सुदामा कुटी आश्रम द्वारा आयोजित रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामानन्दाचार्य की 726वीं जयंती तथा सुदामा कुटी के संस्थापक संत सुदामा दास के वृंदावन आगमन के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। यमुना तट स्थित कुंभ मेला क्षेत्र में आयोजित इस विशाल संत-विद्वत सम्मेलन में देश-विदेश से आए संत-महात्माओं और रामानन्दी सम्प्रदाय के अनुयायियों ने भाग लिया।

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज कभी भी शत्रुओं की वीरता या शक्ति के कारण पराजित नहीं हुआ। उन्होंने कहा,
“हिंदू जब भी हारा है, वह केवल आपसी फूट के कारण हारा है। हमने चार-पांच सौ वर्षों तक मुगलों की दासता और अत्याचार सहे, लेकिन सनातन परंपरा कमजोर नहीं पड़ी। जितना अधिक उसे दबाने का प्रयास हुआ, वह उतनी ही अधिक शक्ति के साथ पुनः खड़ी हुई।”

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत का जन्म ही एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ है।
“आने वाले बीस-तीस वर्षों में भारत विश्वगुरु बनेगा, सुख-शांति देने वाला हिंदू राष्ट्र और धर्म राष्ट्र बनेगा। इसे कोई रोक नहीं सकता। इसके लिए केवल हमारी तैयारी और एकजुटता की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां महाभारत काल जैसी हैं, जब पूरी दुनिया संघर्ष और अस्थिरता से गुजर रही थी।
“ऐसी परिस्थितियां हमें तोड़ नहीं सकतीं। हमने इससे पहले भी ऐसे दौर देखे हैं और हर बार और अधिक सशक्त होकर उभरे हैं।”

भागवत ने समाज में एकता और समरसता पर बल देते हुए कहा कि संघ सभी हिंदुओं को एक समाज मानता है, लेकिन दुनिया उन्हें अलग-अलग देखती है।
“समाज के हर अंग में हमारे मित्र होने चाहिए। केवल पर्वों और जयंती समारोहों में नहीं, बल्कि सुख-दुख के हर क्षण में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना होगा।”

उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ सूत्रों—सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक संस्कार), पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों—का उल्लेख करते हुए कहा कि भेदभाव-मुक्त भारत के निर्माण के लिए सामाजिक समरसता ही एकमात्र मार्ग है।

रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामानन्दाचार्य का स्मरण करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि उन्होंने समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए ऐसा आध्यात्मिक मार्ग दिया, जिससे सभी का कल्याण संभव हुआ।

इस अवसर पर मंच पर साध्वी ऋतम्भरा, गीता मनीषी संत ज्ञानानन्द, नाभा पीठाधीश्वर महंत सुतीक्ष्ण दास, मणिराम छावनी अयोध्या के पीठाधीश्वर, पीपा पीठाधीश्वर बलराम दास, महंत राजेंद्र दास, कमल नयन दास, नेपाल से आए स्वामी रामकृष्ण दास, स्वामी सुदर्शन दास, स्वामी लाडली शरण दास तथा दिल्ली से आए कुमार स्वामी सहित अनेक संत उपस्थित रहे।

इससे पूर्व, मोहन भागवत ने बेंगलुरु इस्कॉन द्वारा स्थापित किए जा रहे विश्व के सबसे ऊंचे ‘वृंदावन चंद्रोदय मंदिर’ में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने ‘अक्षय पात्र’ संस्था की मध्याह्न भोजन योजना का अवलोकन किया और स्वयं बच्चों को भोजन परोसकर उनसे संवाद भी किया।

शताब्दी समारोह से पहले संघ प्रमुख ने सुदामा कुटी में भगवान कौशल किशोर के दर्शन किए, पुनरोद्धारित मंदिर भवन का लोकार्पण किया, सुदामा कुटी के इतिहास पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया तथा गोसेवा पर आधारित फीचर फिल्म ‘गोदान’ का पोस्टर भी जारी किया।

यह शताब्दी समारोह आगामी दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा।

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