धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदारों का बांग्लादेश की घटनाओं पर मुंह बंद है: योगी आदित्यनाथ

प्रयागराज में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के प्राकट्य उत्सव में बोले मुख्यमंत्री—संत समाज की एकता से साकार हुआ राम मंदिर

प्रयागराज (उप्र), 10 जनवरी । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि बांग्लादेश में घटित घटनाओं पर ऐसे लोगों का मुंह बंद है और वे इस पर एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

मुख्यमंत्री माघ मेला क्षेत्र में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संत समाज पूरे समाज को जोड़ने का कार्य करता है और जब संत एक मंच पर आकर उद्घोष करते हैं, तो उसके दूरगामी परिणाम सामने आते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संत समाज की साधना और एकता का प्रतिफल है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साकार रूप दिया। उन्होंने कहा, “देश की आजादी के बाद कई प्रधानमंत्री हुए, सभी ने विकास के बारे में सोचा, लेकिन भारत की मूल आत्मा को सम्मान मिले और अयोध्या में रामलला विराजमान हों—यह भाव केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भीतर था।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने राम मंदिर में दर्शन किए, शिलान्यास में भाग लिया, प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में उपस्थित रहे और मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद सनातन धर्म की ध्वज-पताका के आरोहण में भी सहभागी बने।

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करने वालों पर कटाक्ष करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, “बांग्लादेश की घटनाओं पर इनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने इनके मुंह पर फेवीकोल चिपका दिया हो। न कोई कैंडल मार्च निकाला जा रहा है और न ही कोई विरोध।”

उन्होंने कहा कि यह स्थिति समाज के लिए चेतावनी है। मुख्यमंत्री ने गंगा की निर्मलता का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिवेणी संगम में स्नान की दिव्य अनुभूति हो रही है। “मैंने भी सबसे पहले त्रिवेणी में डुबकी लगाकर मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। आज जो निर्मल जल दिखाई दे रहा है, क्या आठ-दस वर्ष पहले इसकी कल्पना की जा सकती थी?” उन्होंने पूछा।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब रामभक्त और गंगाभक्त देश की सत्ता में होता है, तभी ऐसे दिव्य अवसर प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने मां गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है और यही सच्चे राष्ट्रसेवक की पहचान है।

विपक्षी नेताओं का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज को बांटने का कार्य करते हैं, वे कभी किसी के हितैषी नहीं हो सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए ऐसे लोग केवल अपने परिवार और स्वार्थ के बारे में सोचते रहे और सत्ता से बाहर होने पर भ्रम फैलाने वाले नारे दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब भी ऐसे तत्वों को अवसर मिलेगा, वे पहचान का संकट खड़ा करेंगे, अराजकता फैलाएंगे और सनातन धर्म पर प्रहार करने का प्रयास करेंगे, जिसे किसी भी स्थिति में सफल नहीं होने दिया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वामी राम दिनेशाचार्य जी महाराज, रामानुजाचार्य जी महाराज, राघवाचार्य जी महाराज, संतोषाचार्य उर्फ सतुआ बाबा, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती, दिगंबर अखाड़ा के वैष्णव दास जी महाराज, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह सहित अनेक संत और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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