हर क्षेत्र में भारत को इतना मजबूत बनाना होगा कि इतिहास की पराधीनता का जवाब दे सकें: अजित डोभाल

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद में बोले एनएसए—आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षमता बढ़ाना समय की मांग

नयी दिल्ली, 11 जनवरी । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने शनिवार को कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और सामरिक रूप से इतना सशक्त बनाना होगा कि देश अपने इतिहास की पराधीनता और आक्रमणों का प्रभावी उत्तर दे सके।

‘विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद’ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डोभाल ने स्वतंत्रता संग्राम, भारत की सभ्यता पर हुए आक्रमणों और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में देश भर से लगभग तीन हजार युवा भाग ले रहे हैं।

डोभाल ने कहा, “मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था, जबकि आप स्वतंत्र भारत में जन्मे हैं। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक अपमान और बलिदान सहे। भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवन भर संघर्ष किया, महात्मा गांधी ने सत्याग्रह किया और अनगिनत लोगों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।”

उन्होंने कहा कि भारत के गांव जलाए गए, सभ्यता को नष्ट करने का प्रयास हुआ और मंदिरों को लूटा गया, लेकिन देश लंबे समय तक असहाय बना रहा। डोभाल ने कहा, “यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि भारत के हर युवा के भीतर चेतना और संकल्प की आग होनी चाहिए।”

एनएसए ने कहा, “प्रतिशोध शब्द भले ही अच्छा न लगे, लेकिन यह अपने आप में एक बड़ी शक्ति है। हमें अपने इतिहास से सबक लेते हुए भारत को फिर उस स्थान पर पहुंचाना है, जहां हम अपने विचारों, अधिकारों और आस्थाओं के आधार पर एक महान राष्ट्र का निर्माण कर सकें। इसके लिए हमें आर्थिक, रक्षात्मक और तकनीकी रूप से हर स्तर पर मजबूत होना होगा।”

उन्होंने कहा कि भारत एक महान और विकसित सभ्यता रहा है, जिसने कभी आक्रमण या लूट की नीति नहीं अपनाई, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर उदासीनता के कारण उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। डोभाल ने चेतावनी दी कि यदि आने वाली पीढ़ियां इतिहास के इन सबकों को भूल जाएंगी, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।

युवाओं को ‘भविष्य का नेता’ बताते हुए डोभाल ने इच्छाशक्ति और निर्णायक क्षमता विकसित करने का आह्वान किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “आज देश सौभाग्यशाली है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने बीते दस वर्षों में भारत को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता, अनुशासन और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।”

नेतृत्व के महत्व को रेखांकित करते हुए डोभाल ने नेपोलियन बोनापार्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व ही किसी भी समूह या राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होता है।

उन्होंने कहा कि विश्व में होने वाले अधिकांश युद्ध सुरक्षा चिंताओं के कारण लड़े जाते हैं और उनका उद्देश्य दुश्मन को अपनी शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना होता है। “हमें भी अपनी रक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार रहना होगा,” उन्होंने कहा।

डोभाल ने इच्छाशक्ति का उदाहरण देते हुए दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा का उल्लेख किया और युवाओं को सही निर्णय लेने तथा एक बार निर्णय लेने के बाद उस पर अडिग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “सपने जीवन नहीं बनाते, बल्कि उसे दिशा देते हैं, और सपनों को साकार करने में समय, धैर्य और संकल्प की आवश्यकता होती है।”

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