प्रियंका गांधी ने केरल सरकार से कमजोर आदिवासी समूहों के वन अधिकारों की रक्षा का आग्रह किया

वायनाड (केरल), सात जनवरी – कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने केरल सरकार से राज्य में विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (पीवीटीजी) के वन अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
पार्टी ने एक बयान में कहा कि वाद्रा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति राज्य मंत्री ओ.आर. केलू को लिखे पत्र में यह अनुरोध किया।

कांग्रेस सांसद ने अपने पत्र में कहा कि जब उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया, तो उन्हें बताया गया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत पीवीटीजी को अभी तक अधिकार नहीं दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र के अधिकारों को मान्यता देना महत्वपूर्ण है, जो न केवल आदिवासी लोगों के भूमि अधिकारों की पुष्टि करता है बल्कि उनकी सांस्कृतिक प्रथाओं और पारंपरिक आजीविका की रक्षा भी करता है।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि वनों पर अतिक्रमण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन आदिवासी समुदायों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि वन्यजीवों के बढ़ते हमले और रिहाइशी क्षेत्र का कम होना भी उनकी जीवन शैली के लिए एक गंभीर खतरा है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि आदिवासी समुदायों के लिए सरकारी पहल के सफल न होने का एक कारण इन समूहों, विशेष रूप से पीवीटीजी में अपने अधिकारों के बारे में जागरूकता की कमी और अधिकारों का हनन है।
उन्होंने आदिवासी समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का आ’’ान किया।
वाद्रा ने अपने पत्र में नीलांबुर में चोलानाइकन जनजाति के लोगों से मुलाकात का भी जिक्र किया और बताया कि कैसे उनकी समझदारी, समानता की भावना और पर्यावरण के प्रति सम्मान ने उन्हें प्रभावित किया।

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